सांसद संजय सेठ के सवाल पर केंद्रीय मंत्री का लोकसभा में जवाब,प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए गंभीर है केंद्र सरकार
सांसद संजय सेठ ने लोकसभा में अतारांकित प्रश्नकाल के दौरान सरकार से यह सवाल किया कि विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) को पूरा करने व इसका अनुपालन नहीं करने की स्थिति में क्या कार्रवाई का प्रावधान किया गया है? इसके अतिरिक्त प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए हाल ही में जारी विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व निर्देश की विशेषताएं क्या है? सांसद ने यह भी पूछा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापित की जाने वाली ऑनलाइन प्रणाली किस प्रकार प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने में मदद करेगी?
इसके जवाब में केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा एक नई केंद्रीय कृत ऑनलाइन ईपीआर पोर्टल विकसित की गई है। इस पोर्टल के माध्यम से ईपीआर प्रमाण पत्रों के निर्माण और लेन-देन, आईपीओ और डब्लूपी के बीच लेनदेन की निगरानी, वार्षिक रिटर्न भरने की सुविधा पर्यावरण से संबंधित होने वाली क्षति पूर्ति की वसूली किया जाना है। वहीं इसी पोर्टल के माध्यम से प्लास्टिक पैकेजिंग पर ईपीआर के प्रभावी कार्यान्वयन की अनुमति भी दी जाएगी ताकि बेहतर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण से निपटा जा सके। प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार गंभीर है।
सांसद ने यह भी पूछा था कि ईपीआर कंपनियों की एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके तहत प्लास्टिक पैकेजिंग का ध्यान रखा जाना है। पर्यावरण का ख्याल रखा जाना है और ऐसे प्लास्टिक का उचित प्रबंधन हो सके, इसका भी ध्यान रखा जाना है। इसका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाया है?
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम के अनुसार अब तक 311 ब्रांड मालिकों को पंजीकरण जारी किया गया है। और इन सब के द्वारा इसका अनुपालन सुनिश्चित किया जाता है। इनमें झारखंड के सिर्फ एक उत्पादक प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम के तहत पंजीकृत हैं।
हालांकि मंत्री ने यह भी जवाब दिया की प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के तहत ईपीआर लक्ष्यों की पूर्ति में किसी भी कमी के लिए किसी भी संस्थान से कोई क्षतिपूर्ति की वसूली नहीं की गई है।
यदि कोई संस्थान उसका अनुपालन नहीं करता है तो उन पर कार्रवाई का प्रावधान है और इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल भी खुला है। संबंधित लोग इस पर अपनी बात या शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
ईपीआर की विशेषता बताते हुए मंत्री ने कहा कि इसके तहत उत्पादकों, आयातक और ब्रांड मालिकों के साथ प्लास्टिक अपशिष्ट संसाधनों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। प्लास्टिक पैकेजिंग को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इसके तहत ईपीआर के लिए स्पष्ट रूप से लक्ष्य परिभाषित कर के और उसके प्रबंधन के कार्य से संबंधित निर्देश जारी किया गया है। कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग के पुनः उपयोग के लिए, अनिवार्य प्लास्टिक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण का न्यूनतम स्तर और प्लास्टिक पैकेजिंग में पुनर्चक्रण प्लास्टिक सामग्री का उपयोग से संबंधित भी निर्देश जारी किया गया है।

