आदिवासी-मूलवासी संयुक्त मोर्चा का प्रथम वर्षगांठ समारोह आयोजित
रांची। आदिवासी मूलवासी संयुक्त मोर्चा की स्थापना का प्रथम वर्षगांठ तथा स्मारिका “जागृति” का लोकार्पण समारोह बुधवार को करम टोली स्थित प्रेस क्लब में आयोजित किया गया। इस अवसर पर अतिथि के तौर पर राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, भारत सरकार के पूर्व केबिनेट मंत्री सुबोधकांत सहाय, वामपंथी नेता केडी सिंह, रांची के पूर्व उपमहापौर अजय नाथ शाहदेव, सेवानिवृत्त एयर कमाडोर एके अधिकारी एवं बन्धन लकड़ा सहित संयुक्त मोर्चा के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
इस अवसर पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में विधानसभा है, उसके ऊपर राज्य के लोगों की जनसदन क़ायम करने की दिशा में संयुक्त मोर्चा ने कारगर कदम उठाया है। इसकी सफलता की कामना करता हूं। उन्होंने कहा कि
जब राज्य में राजकीय कामकाज शासन, प्रशासन सही दिशा में काम नहीं करती है, तो जनमत और जनभावना सही दिशा दिखाती है। स्थानीय और नियोजन नीति मेरे मुख्यमंत्रित्व काल में परिभाषित हुईं थी, परन्तु उसके बाद की राज्य सरकार इसे आगे नहीं बढ़ा पाई, जिसका मलाल है। उन्होंने कहा कि स्मारिका जागृति के माध्यम से जनता जागरुक होगी और ज्वलंत मसलों का समाधान होगा। भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर स्थानीय और नियोजन नीति के मसले का समाधान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि आदिवासी मूलवासी संयुक्त मोर्चा राज्य की जनता को जगाने में जनमत संग्रह करने में कारगर कदम उठाएगी और राज्य में उक्त मसले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईगी। राज्य में राजनीतिक हालात सही दिशा में नहीं है। अराजकता की स्थिति है। जिसके कारण आदिवासी मूलवासियों के मूलभूत मसले पर ध्यान नहीं दे रही है। जो काफी दुखद है। मौके पर उपस्थित वामपंथी नेता केडी सिंह एवं पूर्व उपमहापौर अजय नाथ शाहदेव ने कहा कि आदिवासी मूलवासी संगठन जिस भावना और विचार से यहां के आदिवासी मूलवासी समुदायों को एकसूत्र में बांधने का बीड़ा उठाया है और सामाजिक समरसता क़ायम करने की पहल की है, जिससे इस राज्य के लोगों का कल्याण होगा।
वर्षगांठ तथा लोकार्पण कार्यक्रम में प्रस्ताव एवं निर्णय हुआ कि राज्य में राजनैतिक अराजकता, सरकारी खजानों की लूटपाट एवं बंदरबांट में शासन प्रशासन से जुड़े हुए लोग लिप्त है। यह राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। अवस्था को दुरुस्त किए बिना राज्य का विकास असम्भव है। राज्य में पांच लाख के करीब विभिन्न पदों एवं शिक्षकों के पद रिक्त हैं और विगत तीन वर्षों में एक भी नियुक्ति झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा नहीं हुई है।यह स्थिति राज्य के शिक्षित युवा वर्ग के लिए दुखदाई है और भविष्य अंधकारमय है।
आयोजन की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. करमा उरांव ने अपने वक्तव्य में कहा कि अब कलम रुकेगी नहीं। स्मारिका प्रकाशन से राज्य की जनता की आवाज, जनाकांक्षाये एवं ज्वलंत मुद्दे पूरी संवेदनशीलता के साथ मुखरित होगी और समाधान की दिशा सुनिश्चित होगी।
उपस्थित अतिथियों एवं संयुक्त मोर्चा के सदस्यों का स्वागत सुनील कुमार सिंह कार्यक्रम का संचालन अंतु तिर्की एवं धन्यवाद ज्ञापन बलकू उरांव ने किया।
समारोह में एस अली,विभय नाथ शाहदेव, फूलचंद तिर्की, नौशाद खान,आजम अहमद, प्रवीण देवघरिया, प्रेम शाही मुंडा,बहुरा उरांव,शिवा कच्छप , नारायण उरांव ने अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किए। समारोह में संजय तिर्की, भुनेश्वर लोहरा,माधो कच्छप,देवसहाय मुंडा, इजराइल खालिद,अनीता गाड़ी सहित काफी संख्या में आदिवासी मूलवासी संगठनों के प्रतिनिधि गण उपस्थित थे।

