झारखंड विधानसभा मानसून सत्र: दूसरे दिन सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के आसार, कई ज्वलंत मुद्दों पर गरमा सकता है माहौल
रांची: झारखंड विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को सदन के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तल्खी का माहौल दिखाई दिया था और आज यह टकराव और भी गहराने की संभावना बनी। दोनों ही पार्टी के नेता सदन के बाहर हाथ में तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते दिखे।
सत्ता पक्ष केंद्र सरकार के द्वारा सदन में संसद में 130वें संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया है। वहीं विपक्ष के विधायक पूर्व बीजेपी विधायक सूर्या हांसदा हत्या कांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन करते दिखे।
वहींसदन के भीतर से लेकर बाहर तक राज्य की राजनीति कई अहम मुद्दों पर गर्मा सकती है।
सत्तारूढ़ गठबंधन ने साफ संकेत दिया है कि वे आज भी केंद्र सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
एसआईआर (सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट) को लेकर सत्तापक्ष का आरोप है कि इससे झारखंड की पहचान और भूमि अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है।
इसके साथ ही संसद में पारित 130वां संविधान संशोधन बिल को लेकर भी सत्ता पक्ष भाजपा को कठघरे में खड़ा करेगा। सत्ता पक्ष का मानना है कि यह संशोधन बिल राज्य के अधिकारों की अनदेखी करता है और स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं के विपरीत है।
विधानसभा परिसर के बाहर भी सत्तापक्ष के समर्थक संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है।
विपक्षी दलों ने भी आज के सत्र को लेकर पूरी तैयारी कर रखी है। वे सरकार पर कानून-व्यवस्था से लेकर विकास योजनाओं तक कई मुद्दों पर हमला बोल सकते हैं।
पूर्व भाजपा नेता सूर्या हांसदा की हत्या की सीबीआई जांच को लेकर विपक्ष पहले ही मुखर है। आज इस मुद्दे पर सदन में जोरदार बहस और हंगामे के आसार हैं।
रिम्स-2 भूमि विवाद भी एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण और उसके प्रबंधन को लेकर गंभीर लापरवाही बरती है।
राज्य में बढ़ते अपराध, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।
इसके अलावा, विपक्ष शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली संकट, किसानों की समस्या और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों को भी मजबूती से उठाने की योजना बना रहा है।
आज का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि सदन में मुख्यमंत्री प्रश्नकाल निर्धारित है। यह वह समय होता है जब विधायक सीधे मुख्यमंत्री से सवाल पूछ सकते हैं और सरकार को अपने जवाब देने होते हैं।
यदि सदन शांतिपूर्ण ढंग से चला तो आम जनता की समस्याओं पर गंभीर चर्चा हो सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, सड़क और बिजली परियोजनाओं की प्रगति, किसानों को मिलने वाली योजनाओं का लाभ, और बेरोजगारी के सवालों पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है।
मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री इस अवसर पर सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का खाका भी पेश कर सकते हैं।
हालांकि, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि विपक्ष किसी भी कीमत पर इस मौके को खोना नहीं चाहेगा और प्रश्नकाल को बाधित करने की कोशिश कर सकता है ताकि सरकार को कठघरे में खड़ा किया जा सके।
झारखंड की आम जनता की नजर भी इस मानसून सत्र पर टिकी हुई है।
किसानों को उम्मीद है कि बारिश से प्रभावित फसल और कृषि संकट पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।
बेरोजगार युवाओं को आशा है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया और नई नौकरियों के अवसरों पर स्पष्ट जवाब देगी।
सोमवार का यह दिन विधानसभा सत्र के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर सत्तापक्ष केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष राज्य सरकार को उसकी नाकामियों के लिए कटघरे में खड़ा करने को तैयार है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन में लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत ठोस बहस और समाधान निकलता है या फिर सत्र केवल शोरगुल और हंगामे में सिमटकर रह जाता है।
प्रदर्शन करने वालों में बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी,मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल,नीरा यादव,प्रदीप प्रसाद ,अमित यादव सहित कई विधायक थे।
वहीं सत्ता पक्ष में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर,इरफान अंसारी,शिल्पी नेहा तिर्की,राजेश कच्छप सहित कई विधायक थे।



