श्रद्धा और सुविधाओं का केंद्र बनेगा बटेश की नगरी, 25 करोड़ की लागत से पर्यटन स्थल के विकास का मास्टर प्लान तैयार

भागलपुर। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर कहलगांव के समीप गंगा तट पर स्थित बाबा बटेश की नगरी बटेश्वर स्थान यानी गुप्त काशी को श्रद्धा और पर्यटन का केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। पर्यटन विभाग द्वारा इस ऐतिहासिक तीर्थस्थल के समग्र विकास के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है।

मालूम हो कि यह स्थल शैव, वैष्णव, बौद्ध, जैन, सफा व शाक परंपराओं का केंद्र रहा है. यहां का इतिहास अति-प्राचीन व गौरवशाली रहा है। बौद्धकालीन मूर्तियों और अवशेषों से यह क्षेत्र पुरातत्वविदों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यत रोचक और अध्ययन योग्य है. डॉ लक्ष्मीकांत मिश्रा जैसे इतिहासकारों के प्रयासों से बाबा बटे धरनाथ के पुरातात्विक महत्व को संरक्षित किया गया। प्राप्त संस्कृत शिलालेख में आषाढ शुक्ल द्वितीया (पूर्णवसु नक्षत्र) को बाबा की विशेष पूजा का उल्लेख मिलता है।

ज्ञात हो कि बटेश की नगरी में स्थापित आपस्थी महादेव है. यहां मुनि वशिष्ठ ने तप और आराधना की थी। मंदिर में शिवलिंग के सामने दक्षिणमुखी आदिशक्ति मां जगत जननी मां महाकाली की प्रतिमा है और पास में ही शमशान घाट है. यह संयोग देश में कहीं और नहीं मिलता, बटेसर धाम की पवित्र भूमि पर भगवान बुद्ध ने भी तीन माह रहकर साधना की थी. चौरासी मुनि एवं अन्य ऋषि मुनियों ने साधना की थी, यहां बटे चार पपड़ी पर अभी भी चौरासी मुनि गुफा है.यहा नागा बाबा ने भी यहां साधना करते हुए समाधि ली है। आज भी उनका समाधि स्थल यहां विद्यमान है, नागा बाबा मंदिर भी गंगा के किनारे है।

        इस परियोजना का प्रस्ताव लुइट वैली एजेंसी ने तैयार किया है। मंगलवार को एजेंसी के आर्किटेक्ट ने भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी के समक्ष प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। इस दौरान डीएम ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए, जिन्हें प्रस्ताव में शामिल कर अंतिम रूप दिया जाएगा। संशोधित प्रस्ताव को जल्द ही पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा, जिसके बाद कार्य प्रारंभ होने की उम्मीद है।

पर्यटन विभाग को आशा है कि बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा से पूर्व इस योजना को स्वीकृति मिल जाएगी और विकास कार्य तेजी से आरंभ हो जाएगा। परियोजना के तहत बटेश्वर स्थान में धर्मशाला, डॉल्फिन वॉच टावर, रेस्टोरेंट, बोटिंग सुविधा तथा फ्लोटिंग जेटी का निर्माण प्रस्तावित है।

इसके अलावा, प्राकृतिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए ‘शांति वन’ विकसित किया जाएगा, जिसमें नेचुरल थेरेपी सेंटर, योग स्थल और वेलनेस सेंटर की भी व्यवस्था होगी, जिससे पर्यटक न केवल धार्मिक बल्कि मानसिक और शारीरिक शांति का भी अनुभव कर सकें।

परियोजना में एक छोटे आकार का ग्लास ब्रिज भी शामिल है, जो आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा। वाहन पार्किंग, आकर्षक लाइटिंग और आरामदायक बैठने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि बटेश्वर स्थान के विकास की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक समृद्धि भी आएगी।

एजेंसी के आर्किटेक्ट निशांत के अनुसार, परियोजना की रूपरेखा तैयार है और पर्यटन विभाग द्वारा इस पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। बटेश्वर स्थान के पुनर्विकास की यह योजना क्षेत्र को एक नई पहचान देगी।

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