मानव तन की उपादेयता ईश्वर भक्ति में है: स्वामी प्रमोद जी महाराज
रांची: महर्षि मेंही आश्रम में शनिवार को जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वधान में दो दिवसीय संतमत सत्संग का शुभारंभ प्रातकालिन स्तुति ग्रंथ पाठ के साथ शुरु हुआ ।आज के सत्संग में मेंही आश्रम कुप्पाघाट भागलपुर के वर्तमान आचार्य महर्षि हरिनंदन परमहंस जी महाराज के प्रतिनिधि स्वरुप पूज्य स्वामी प्रमोद जी महाराज ने उपस्थित भक्तों को कहा कि मनुष्य शरीर में सभी देवता तीर्थ एवं विधाये है गुरु के शरण में जाने से सभी देवता तीर्थ एवम् विधाये प्राप्त हो जाते हैं। अतः देव दुर्लभ तन से गुरु की भक्ति करनी चाहिए आगे उन्होंने कहा कि मानव तन की उपादेयता प्रभु भक्ति में है विषयों का सुख क्षणिक और दुखदाई होता है।
होता है अथा हमें विषय सुख छोड़कर निरविषय तत्व की खोज करनी चाहिए।
डॉ स्वामी डॉ विवेकानंद जी ने कहा कि गुरु की कृपा से मानव मोक्ष मार्ग को जानता है यह मार्ग मानव तन में ही है।इस मार्ग को ही सुषमना आज्ञाचक्र शहरग नाम से जाना जाता है। आश्रम के स्वामी पूज्य निर्मलानंद जी महाराज ने कहा कि हमें संसार में अनाशक्त भाव से रहना चाहिए लोगों को संसार में जल कमलवत रहना चाहिए महापुरुषों के संग से ही जीव का कल्याण होता है। अतः हमें सत्संग से हमेशा जुड़कर रहना चाहिए और ईश्वर भक्ति करके मानव तन पाने के उद्देश को सफल करना चाहिए।
स्वामी परमानंद जी महाराज ने कहा कि ज्ञान का दान सर्वोत्तम होता है जीवन में दांत का बड़ा महत्व होता है जो दान करते हैं वह कभी निर्धन नहीं होते हैं।
इस अवसर पर हजारों भक्तों के साथ-साथ रांची जिला संतमत सत्संग समिति के सदस्य पदाधिकारी गण एवं शहर के कई अतिथि विशिष्ट जन उपस्थित थे समिति रांची वासियों से निवेदन करते हुए कहा कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में सत्संग में भाग लेकर इस को सफल बनाएं

