सुप्रीम कोर्ट का नोटिस सरकार के लिए आईना है, अब युवाओं के सवालों से भाग नहीं सकती सरकार :डॉ. देवशरण भगत

रांची: JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा JPSC सिविल सर्विस प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस जारी करना बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का नोटिस सरकार के लिए गंभीर चेतावनी है। जिस मामले को सरकार अब तक प्रशासनिक स्तर पर संभालने की कोशिश कर रही थी, वह अब देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष पहुंच चुका है। इससे साफ है कि झारखंड के युवाओं के सवालों को दबाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले छात्रों के आंदोलन के दबाव में कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया और अब उन निर्णयों पर न्यायालय में चुनौती सामने है। झारखंड हाईकोर्ट ने भी 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा तथा संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाई है।

डॉ. भगत ने कहा कि सरकार को अब रद्दीकरण की राजनीति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की राजनीति करनी होगी। अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो दोषी कौन है? किस स्तर पर चूक हुई?

किसकी मिलीभगत थी? और सबसे बड़ा सवाल—ईमानदारी से परीक्षा देने वाले लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ की जिम्मेदारी कौन लेगा?

उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC सिर्फ भर्ती आयोग नहीं हैं, ये झारखंड के युवाओं के भविष्य का दरवाजा हैं। उस दरवाजे पर अगर भ्रष्टाचार और अनियमितता का ताला लग गया है तो उसे खोलने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।

आजसू नेता ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि युवाओं को नौकरी चाहिए, नौटंकी नहीं; पारदर्शिता चाहिए, राजनीतिक प्रबंधन नहीं; न्याय चाहिए, आश्वासन नहीं।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। CBI अथवा किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच से सरकार को डर क्यों है? यदि सरकार का तंत्र पूरी तरह निष्पक्ष और सक्षम है तो स्वतंत्र जांच के सामने आने में उसे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

डॉ. भगत ने कहा कि आजसू पार्टी की स्पष्ट मांग है कि—

JPSC-JSSC की विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो।

परीक्षा से जुड़े सभी OMR, CCTV फुटेज, सर्वर लॉग और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं।

दोषी अधिकारी, कर्मचारी, एजेंसी अथवा अन्य संलिप्त लोगों की जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई हो।

ईमानदार अभ्यर्थियों को किसी भी स्थिति में दोषियों की गलती की सजा न मिले।

भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था में पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि झारखंड के नौजवानों ने सड़क पर संघर्ष करके सरकार को आईना दिखाया है और अब सुप्रीम कोर्ट का नोटिस उस आईने को और बड़ा कर रहा है। सरकार को अब युवाओं की आवाज सुननी होगी।

नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ बंद कीजिए। परीक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रयोगशाला मत बनाइए। दोषियों को बचाने के बजाय जिम्मेदारी तय कीजिए—यही झारखंड के युवाओं के साथ न्याय होगा।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *