पूर्णिया में वर्दी को कुछ पुलिस वाले लगातार कर रहे दागदार…
गणादेश ब्यूरो
पटना: पूर्णिया जिले के कुछ पुलिसकर्मियों की वजह से लगातार वर्दी दागदार हो रही है। जिले के वरीय अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय इस तरह के मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस कर्मियों के खिलाफ और अधिकारियों के द्वारा कार्रवाई भी हुई है। उसे नौकरी से डिसमिस करने तक की प्रक्रिया की जा चुकी है। लेकिन अधिकांश मामलों में सिर्फ कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। जिले के पुलिस कर्मियों के ऊपर शराब तस्करी ,जबरन जमीन हड़पने, भू माफियाओं से सांठगांठ होने , मुर्गा नहीं देने पर मारपीट करने और आरोपियों को बचाने के लिए सही समय पर न्यायालय में आरोपपत्र नहीं दाखिल करने समेत कई अन्य तरह के लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं । कुछ मामलों में तो वरीय अधिकारियों के द्वारा जांच पड़ताल तक नहीं करवाई गई ,और पीड़ित के द्वारा दिए गए आवेदन को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लगातार पुलिसकर्मियों के खिलाफ लग रहे आरोप के बाद आम लोगों में भी यह बात चर्चा का विषय है। आने वाले समय में देखने वाली बात होगी कि ऐसे आरोपी पुलिसकर्मियों पर अधिकारियों के द्वारा कोई कार्रवाई की जाती है या नहीं।कुछ पुलिसकर्मियों पर आरोप लगने के बाद पुलिस अधीक्षक के द्वारा सदर एसडीपीओ से जांच करवाई गई । मामला सही पाए जाने के बाद में लाइन हाजिर कर दिया गया। लेकिन उसके कुछ ही दिनों के बाद उन्हें नई जगह पोस्टिंग दे दी गई। एसपी दयाशंकर ने बताया कि जमीन विवाद मामले को काफी बारीकी से सुलझाने का प्रयास किया जाता है। जिस पक्ष की बात नही बनती है,वह पुलिस पर ही मनगढ़ंत आरोप लगाने लगते हैं। इस तरह का मामला यदि संज्ञान में आता है तो कार्रवाई भी की जाती है।
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केस स्टडी -1
……. सब इंस्पेक्टर रैंक के अफसर के खिलाफ न्यायालय में दायर किया परिवाद पत्र
शहरी क्षेत्र के एक सब इंस्पेक्टर रैंक के पदाधिकारी जो फिलहाल एक छोटे थाने के प्रभार में हैं। उनके खिलाफ विपक्षी से मिलकर जमीन कब्जा करवाने का आरोप लगाया गया। इस मामले में पीड़ित के द्वारा न्यायालय में उनके खिलाफ परिवाद पत्र दायर किया गया है।
केस स्टडी -2
…..शराब तस्करों को रुपया लेकर छोड़ने के बाद किया गया डिसमिस
जिले में पदस्थापित एक सिपाही के द्वारा शराब तस्कर से मोटी रकम लेकर शराब लदी गाड़ियों को छोड़ने का आरोप सत्य साबित होने के बाद उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। फिलहाल उक्त बर्खास्त सिपाही हाईकोर्ट की शरण में है।
केस स्टडी -3
…… थानाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगने के कुछ ही दिनों के बाद कर दी गई पोस्टिंग
जिले के एक थानाध्यक्ष के खिलाफ आम लोगों के द्वारा लिखित आवेदन आईजी और एसपी को दिया गया था। इस मामले में सदर एसडीपीओ के द्वारा जांच पड़ताल करवाने के बाद मामला सत्य पाया गया था । उन्हें लाइन हाजिर तो किया गया लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उन्हें दूसरे थाने में पोस्टिंग दे दी गई।
केस स्टडी -4
…… आरोपियों को लाभ दिलाने के लिए समय पर नहीं दाखिल किया आरोप पत्र
जिले के कई पुलिसकर्मियों ने आरोपियों को बचाने के लिए न्यायालय में समय पर आरोप पत्र दाखिल नहीं किया । जिस पुलिसकर्मी के खिलाफ न्यायालय से कार्रवाई करने को लेकर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा गया। उनके खिलाफ एसपी ने कार्यवाही करते हुए उन्हें लाइन हाजिर तो किया । लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उन्हें दूसरी जगह पोस्टिंग कर दिया गया ।
……केस स्टडी -5
तबादला होने के बाद भी महीनों से जमे हैं सरकारी आवास पर
जिले के कई ऐसे पुलिसकर्मी हैं जिनका तबादला कई माह पहले ही दूसरे जिले में हो गया है । लेकिन कई माह बीतने के बावजूद भी उनके द्वारा सरकारी आवास खाली नहीं किया जा रहा है । ऐसे मामलों में सबसे दिलचस्प बात यह है कि कई ऐसे भी पुलिसकर्मी हैं, जिनकी पोस्टिंग दूसरे अनुमंडल में है । लेकिन वह अक्सर रात को क्षेत्र छोड़कर पूर्णिया स्थित सरकारी आवास में ही आ कर रहते हैं।
……यह मामला भी रहा सुर्खियों में
*के हाट सहायक थाना क्षेत्र में दस दिन पूर्व दिन दहाड़े चार घण्टे तक जेसीबी से घर ढहा दिया । लेकिन घटना के वक़्त पुलिस नहीं पहुंची। उल्टे पीड़ित पर काउंटर केस कर दिया गया।
*केहाट थानाध्यक्ष के द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करने पर राजस्व कर्मचारी और उनकी पत्नी ने थाना के कुछ मीटर की दूरी पर दे दिया था धरना
*मरंगा थानाध्यक्ष ने सदर एसडीओ के द्वारा दिये गए आदेश का भी समय पर
तामिला नहीं करवाया , मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ था।
*के हाट सहायक थाना क्षेत्र के सुभाष नगर में मकान मालिक को ही रेंटर ने घर से बाहर कर दिया था।
*आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ न्यायालय ने संज्ञान ले लिया है। मामला घर मे घुस कर मारपीट और प्रताड़ित करने का है।
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……एक सीमा तक ही पुलिसकर्मी देख सकते हैं मामला
पूर्णिया प्रक्षेत्र के आईजी सुरेश प्रसाद चौधरी ने बताया कि जमीनी विवाद समेत अन्य मामलों में एक सीमा तक ही पुलिस कर्मियों को कार्रवाई करने का अधिकार है । पुलिसकर्मियों के खिलाफ लिखित शिकायत मिलने पर जांच पड़ताल कर कार्रवाई की जाएगी ।

