कहलगांव का बेटा रितेश साइकिल से एवरेस्ट कैंप तक! इच्छाशक्ति, संघर्ष और साहस की अनोखी गाथा
भागलपुर। साहस, जुनून और असंभव को संभव बनाने की जिद।इन तीनों ने मिलकर कहलगांव के युवा रितेश कुमार की ऐसी कहानी लिखी है, जिस पर पूरा भागलपुर गर्व कर सकता है। कहलगांव नपं क्षेत्र स्थित वार्ड संख्या एक, पठानपुरा मुहल्ला निवासी 26 वर्षीय रितेश कुमार, जो गोपी साह के पुत्र हैं, ने वह कारनामा कर दिखाया है, जिसके बारे में सोचकर ही लोग थक जाते हैं। उन्होंने बिल्कुल बिना गियर वाली साधारण साइकिल से दिल्ली से लेकर 5364 मीटर ऊंचे एवरेस्ट बेस कैंप तक की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली। मालूम हो कि रितेश के इस मिशन को लेकर कहलगांव के एसडीपीओ कल्याण आनंद ने हाल ही में हौसला आफजाई की थी।
23 अक्टूबर से शुरू हुआ साहस का सफर
रितेश ने अपनी असाधारण यात्रा की शुरुआत 23 अक्टूबर की आधी रात ठीक 12 बजे दिल्ली के अशोकनगर से की। साधारण साइकिल, सीमित संसाधन और जेब में सिर्फ सपने… लेकिन मन में था अडिग विश्वास। कठिन रास्ते, पहाड़ी मोड़, लगातार बदलते मौसम, ऑक्सीजन की कमी, बर्फीली हवाएं – हर कदम पर रितेश की परीक्षा होती रही।
41 दिन की जंग, और 3 दिसम्बर को मिली जीत
लगातार 41 दिनों की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद आखिरकार 3 दिसम्बर 2025 को दोपहर 12 बजे रितेश ने साइकिल से एवरेस्ट कैंप की ऊँचाइयों को छू लिया। यह क्षण केवल उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे कहलगांव और भागलपुर के लिए गौरव का विषय बन गया।
रितेश के पिता गोपी साह बताते हैं, ‘बेटा कई मुश्किलों से जूझता रहा—बीमारी, ठंड, रास्ते की दिक्कतें। पर उसने कभी हार नहीं मानी। हमने उससे बात की तो बोला, ‘पापा, मुश्किल है पर रुकना नहीं है।’
वापसी में अटका जज़्बा – अब मदद की जरूरत
अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल करने के बाद अब रितेश एक बड़ी चिंता से जूझ रहा है।वापस लौटने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। पिता गोपी साह ने सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से हाथ जोड़कर आर्थिक मदद की अपील की है ताकि यह जांबाज युवक सुरक्षित घर लौट सके।
कहलगांव के लिए प्रेरणा का स्रोत
रितेश की यात्रा केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं। यह हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखता है। उनकी कहानी बताती है कि इच्छाशक्ति के सामने पहाड़ भी झुक जाते हैं।



