अब मछलियों पर नहीं, हुनर और हौसलों पर चलेगा घर, परिधि संस्था ने दिखाई वैकल्पिक रोजगार की राह
भागलपुर। जिले के कहलगांव स्थित गंगा की लहरों के किनारे, कोवा पुल के पास बने एक नए गेस्ट हाउस में आज कुछ अलग ही नज़ारा था। पारंपरिक जाल और नावों से आगे सोचते मछुआरों की आंखों में उम्मीद की चमक थी। मौका था। परिधि संस्था द्वारा आयोजित मछुआ वैकल्पिक रोजगार कार्यशाला का, जहां मछलियों से आगे की दुनिया दिखाई गई।
कार्यशाला की शुरुआत गंगा मुक्ति आंदोलन से जुड़े जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और वार्ड पार्षद योगेंद्र सहनी ने की। उन्होंने प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और वैकल्पिक आय के इस प्रयास को समय की ज़रूरत बताया।
परिधि के निदेशक, उदय ने साफ कहा -जब गंगा की मछलियां घट रही हैं, तो हमें ऐसे रोजगार की ओर बढ़ना होगा, जिसमें मुनाफा भी हो और महिलाओं को घर बैठे काम का मौका भी मिले।
कार्यशाला का पहला हिस्सा था – वैल्यू एडिशन प्रशिक्षण, जिसे जल-जीविका पूर्णिया की अंजना प्रसाद ने संचालित किया। उन्होंने मछली से अचार, कटलेट, मोमो, समोसा, रोल और बर्गर जैसे उत्पाद बनाने की विधि सिखाई। खास बात यह रही कि ये प्रशिक्षण आगे और भी गहराई से होगा, जिसमें लाइव डेमो भी शामिल रहेगा।
दूसरे सत्र में रचनात्मकता और हुनर का संगम देखने को मिला। सुश्री आद्या आनंद ने महिलाओं को जूट से बने गहने – कान, नाक, गला और हाथ के लिए बनाने का हुनर सिखाया। पुराने हुनर को नए दौर की जरूरत से जोड़ते हुए उन्होंने कहा, जूट अब सिर्फ बोरे बनाने के काम नहीं आता, यह फैशन और डिज़ाइन का नया चेहरा बन चुका है।
कार्यक्रम के दौरान रांची से आए नीरज वर्मा ने कहलगांव की भौगोलिक खासियतों पर प्रकाश डालते हुए सुझाव दिया कि यहां केज फिशिंग और बायोफ्लैक्स विधि से मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने डॉल्फिन सेंचुरी के इको-टूरिज्म से भी रोजगार जोड़ने की बात की।
कार्यक्रम में 60 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और वैकल्पिक आय के इन नए गुरों को सीखा। इनमें किरण देवी, कुंज बिहारी, रीता देवी, रीना देवी, मनोज कुमार, जूली देवी, द्रोपदी, नरेश सिंह, रोहित कुमार जैसे प्रतिभागी शामिल थे, जिनके चेहरों पर सीखने और कुछ नया करने का उत्साह साफ झलक रहा था।
गंगा के तट से उठती यह नई पहल सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है जो मछुआ समुदाय को पारंपरिक सीमाओं से निकाल कर आत्मनिर्भरता की नई दिशा में ले जा रही है।



