संसार में सनातन धर्म को कोई भी समाप्त नहीं कर सकता: रामानुजाचार्य जियर स्वामी महाराज
पटना।संसार में श्रीहरि नारायण की लीला निराली है!विश्व में सनातन धर्म को कोई भी समाप्त नहीं कर सकता!धर्म मनुष्य की आत्मा है!उक्त बातें जगतगुरु रामानुजाचार्य जियर स्वामी जी महाराज ने कही।वे भोजपुर जिले के चरपोखरी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्तों को संबोधित कर रहे थे।गौरतलब हो कि बुधवार को दक्षिण भारत से आए श्री संप्रदाय के जगतगुरु रामानुजाचार्य जियर तोताद्रि स्वामी जी महाराज का स्वागत लक्ष्मी नारायण मंदिर के मठाधीश रंगनाथाचार्य जी महाराज व उनके सानिध्य में ग्राम के उर्जित ग्रामीणों द्वारा गाजे बजे के साथ किया गया।महाराज श्री के पहुंचते ही हजारों की संख्या में हाथी घोड़े व दर्जनों वाहनों के साथ बाइक सवार लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर लक्ष्मीनारायण मंदिर सोनवर्षा में पहुंचने पर उनका पुष्पों से स्वागत किया गया। तत्पश्चात महाराज जी व्यासपीठ मंच पर पहुंचे। जहां की भक्तों ने माल्यार्पण कर उनका अभिनन्दन किया। उसके बाद स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में मठिया के विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोचार के साथ उनका विधिवत रूप से अभिनंदन स्वागत किया व महाराज श्री को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। उसके बाद भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी जी महाराज ने उत्तर भारत में वैष्णव संप्रदाय के विकास की बड़ा ही सुंदर कालचक्र बताया।भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार संतों की भूमि रही है। आज बिहार आकर उनको बहुत अच्छा लग रहा है। यहाँ आने पर जो स्वागत व स्नेह लोगो का मिला वह अपने आप में अद्भुत है।बिहार के भोजपुर जिले के सोनवर्षा मठिया में आकर उनको अलग अनुभूति हो रही है। उन्होंने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म विश्व का सबसे बड़ा धर्म है। इस धर्म को लेकर जो भी लोग, राजनीतिक दल टिक्का टिप्पणी करते हैं !वे समझ जाए कि सनातन को कोई भी मिटा नहीं सकता! क्योंकि यह सबसे बड़ा धर्म है! अनंत विभूषित कथा ब्यास श्री रंगनाथाचार्य जी महाराज ने दिव्य प्रवचन में बोले कि जिन्होंने संतो का सत्संग नहीं किया!संतो के आश्रय नहीं लिए! संतो के दिव्य दर्शन नहीं प्राप्त किए! उनका जीवन व्यर्थ हो जाता है।भाव के साथ सत्संग सुनने से विवेक की जागृति हो जाती है!विवेक के जागृति हो जाने से जीवन की यात्रा में सुंदर मार्ग प्रशस्त हो जाता है।महाराज जी ने ऐसे मनमोहक ढंग से महाभारत के कई दिव्य प्रसंग सुनाए कि श्रोताओं के करुण्नेत्रों से आश्रुधारा बहने लगे। साज बाज पर संगत कर रहे कलाकारों ने बड़े ही निष्ठा के साथ संगत किए।महाराज श्री के आगमन पर इलाके के दर्जनों गॉव के हजारों लोग उपस्थित थे। वही इस भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में तोताद्री स्वामी जी केआगमन से यह उत्सव महोत्सव में बदल गया। घंटो भक्ति रस की धारा बहती रही वही पूरे जिले से लोग जनप्रतिनिधि सामाजिक कार्यकर्ता व भक्तगण पहुंच रहे हैं।

