हड़ताल मे झारखंड मे 50 लाख से ज्यादा कामगारों और कर्मचारियों ने हिस्सा लियाः ट्रेड यूनियन 29 मार्च को राजभवन कूच करने का फैसला
रांचीः केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और श्रमिक फेडरेशनो के आह्वान पर केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय संपदा का मेगासेल लगाने, मजदूर विरोधी चार लेबर कोड लाने और निजीकरण के खिलाफ आयोजित दो दिन की देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन झारखंड मे विभिन्न उधोगों, प्रतिष्ठानो और वित्तीय संस्थानों मे हड़ताल का व्यापक असर रहा. कोल इंडिया की झारखंड में अवस्थित तीन कंपनियों सीसीएल, बीसीसीएल और ईसीएल मे कोयला का उत्पादन और ट्रांसपोर्टेशन लगभग बंद रहा. कोल इंडिया की ही अनुषंगी कंपनी सीएमपीडीआई मे सौ प्रतिशत हड़ताल रही. बोकारो इस्पात संयंत्र मे 80 प्रतिशत ठेका कामगार हड़ताल पर रहे. तांबा, बाक्साइट और माइका उधोग मे हड़ताल का व्यापक असर रहा.पं.सिंहभूम के किरीबुरू, मेगाहातुबुरू और चिड़िया क्षेत्र मे अवस्थित लौह अयस्क की खदानो मे हड़ताल के चलते काम ठप्प रहा. राज्य के बैंकों , बीमा सेक्टर और डाकघरों मे हड़ताल के चलते कोई काम काज नहीं हुआ. पावर सेक्टर मे केवल दामोदर घाटी निगम मे हड़ताल रही. निर्माण और परिवहन सेक्टर जहां अधिकांश असंगठित क्षेत्र के मजदूर काम करते हैं वहां 80 प्रतिशत हड़ताल रही. पत्त्थर और बीडी सेक्टर मे एक सौ प्रतिशत हड़ताल रही. झारखंड के तीस हजार सेल्स प्रमोशन इंप्लाईज हड़ताल पर रहे.मैरी गोल्ड रेलवे जिससे
ललमटिया से एनटीपीसी के कहलगांव और फरक्का थर्मल पावर को कोयले की आपूर्ति होती है वहां गैंग मैनों की हड़ताल के चलते डिस्पैच का काम पुरी तरह बंद रहा.
झारखंड के दो लाख स्कीम वर्कर जिनमें आंगनवाड़ी सेविका – सहायिका, सहिया, मध्याह्न भोजन के कामगारों समेत मनरेगा मजदूर हड़ताल पर रहे. राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों की हड़ताल मे आंशिक भागीदारी रही.
राज्य के किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कई जगह राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना देकर आवागमन को कई घंटे तक ठप्प रखा. कई स्थानों पर रास्ता रोक रहे किसानों को गिरफ्तार भी किया गया.
राजधानी रांची मे मजदूरों – कर्मचारियों का एक जूलूस सैनिक बाजार से निकाला गया जो महात्मा गांधी मार्ग (मेन रोड) से गुजर कर अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा. जहां एक संयुक्त सभा की गई. हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को राजभवन कूच किया जाएगा.

