खतियान आधारित स्थानीय नीति बनाने की मांग को लेकर कई संगठनों ने किया प्रदर्शन 
रांची : राजधानी रांची की सड़कों पर बुधवार को हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं, महिला-पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में 1932 का खतियान,नियोजन नीति, झारखंडी भाषा के अधिकार को लेकर आंदोलन करते दिखे।
बिरसा मुंडा समाधि स्थल से बिरसा उलगुलान पदयात्रा का शुभारंभ हुआ और बिरसा मुंडा जेल के पास समापन हुआ। पाहन के द्वारा पूजा- अर्चना कर धरती आबा को याद किया गया और उनके आदर्शों पर चलने की शपथ ली गयी। वक्ताओं ने कहा कि यह पदयात्रा एक आगाज है, अब हमलोग पूरे छोटानागपुर में लोगों को जागरूक करेंगे और अपना हक लेकर रहेंगे । आज बिरसा आबा के शहादत प्रांगण से ये आह्वान करते हैं कि सरकार एक महीने के अंदर हमारी मांग को पूरा करे अन्यथा जैसे हमने रघुवर सरकार के घमंड को चकनाचूर किया था, हेमंत सरकार को भी नहीं छोड़ेंगे –
हमारी मुख्य माँगे –
1) खतियान आधारित स्थानीय नीति 1 महीने के अंदर बनाये सरकार
2) राज्य की 9 मुख्य स्थानीय भाषों को तथा विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके सभी जनजातियों की भाषाओं को पूरे राज्य में छेत्रिय भाषा का दर्जा दे सरकार
3) 1 महीने के अंदर दखलदिहानी के सभी मामलों में रैयतों को जमीन वापसी की जाए
झारखंड राज्य ( छोटानागपुर छेत्र ) को बचाने के लिए 1784 में वीर शहीद तिलका माँझी जी ने बाहरी / घुसपैठियों के खिलाफ पहली बार विद्रोह किया था, उसके बाद लगातार सिधो-कान्हो, आबा बिरसा मुंडा, वीर बुधू भगत एवं अन्य वीर महिला-पुरुषों ने अपना बलिदान देकर 200 सालों की लड़ाई लड़कर इस राज्य को बचाकर हमें दिया है, आज की युवा पीढ़ी उनके पद चिन्हों पर चलते हुए अपना राज्य अपने अधिकार को लेने के लिए आगे आ रहा है ।
तत्पश्चात पदयात्रा 1932 का खतियान लागू करो, नियोजन नीति लागू करो ,भाषा का अधिकार देना होगा ,जल जंगल जमीन की लूट बंद करो ,जैसे नारा लगाते हुए आगे बढ़ा,जहां अनेक वक्ताओं ने अपने बात को रखा –
अजय टोपपो ने कहा – यह गैरकानूनी सरकार वर्तमान एवं इससे पहले भी सत्ता पर काबिज रही क्योंकि आदिवासी मूल वासियों के जमीन के लूट हो रही है न्यायालय के आदेश का पालन भी नहीं हो रहा है।
* नेत्री निरंजन हेरेंज* ने कहा – कि तमाम राजनीतिक दलों ने झारखंडयों का शोषण किया है । अब युवा जाग गया है, आपने हक़ अधिकार लेने तक रुकेंगे नहीं ।
युवा नेता शशि पन्ना ने कहा – कि झारखंड में पहले नीति बने फिर नियुक्ति हो। 21 साल बाद भी स्थानीय नीति तय नहीं होने के वजह से बाहरी लोग हमारा को रोजगार छिन ले रहे है। खतियान आधरित स्थानीय नीति बने और यहां का रोजगार सिर्फ झारखंडियों को मिले।
युवा सामाजिक कार्यकर्ता अनिल पन्ना ने कहा – कि झारखण्ड सरकार से बहुत उम्मीद है, हमलोग जल्द से जल्द चाहते हैं कि सबसे पहले खतियान के आधार स्थानीय नीति बनाया जाए।पहले नीति बने ,फिर नियुक्ति की जाए।बाहारी भाषाओ को पूरे राज्य से हटाया जाए और झारखण्ड के सभी जिलों में 9 जनजाति व क्षेत्रीय भाषा को लागू किया जाए।
युवा नेता राज कचछप ने कहा – जल जंगल जमीन हमारा है, यहाँ राज गैरों का नहीं चलेगा । आज यहाँ नियुक्तियों में घुसपैठ हो रही है, जमीन में घुसपैठ हो रही है, यहाँ की तमाम नीतियों में घुसपैठ हो रही है, वो अब बर्दाश्त नहीं करेंगे ।
प्रवीण कच्छप ने कहा – बाहरी अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेंगे, हेमंत सरकार से आग्रह है जल्द से जल्द झारखंडियों की भावनाओं के अनुरूप नीतियाँ जल्द से जल्द बनाई जाए ।
रमेश मुखिया ने कहा – जल जंगल जमीन हमारा है , इसपर बहुत तेज़ी से अतिक्रमण होता जा रहा है। सरकार अपना काम करे वरना हमलोग फिर से उलगुलान करने को बाध्य होंगे
एल्विन लकड़ा ने कहा – हमारे सभी स्थानीय विधायक अपना काम ईमानदारी से करें, हमने आप सबको अपना वोट ही नहीं दिया बल्कि आपको अपना अगुवा माना है, आपसे बहुत उम्मीदें हैं आप हमें निराश न करें अन्यथा हमें मजबूर होकर सरकार के खिलाफ भी उलगुलान करना होगा
अमनदीप मुंडा ने कहा – राज्य का युवा नौकरियों के लिए तैयारी करते करते थक जा रहा है, उसकी उम्र खत्म होती जा रही है, लेकिन यहाँ गलत नीतियों के अनुसार नियुक्तियाँ लेने की प्रक्रिया होती है, फिर कोर्ट में चली जाती है, अंततः बहुत सारी नियक्तियाँ रद्द हो जाती हैं। इसकी वजह से युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है, आरक्षण नहीं मिल रहा है इसलिए आज युवा आगाज करता है, अपना हक लेकर रहेंगे । हमें स्थानीय नीति , नियोजन नीति, आरक्षण नीति 1 महीने के अंदर चाहिए, वरना राज्य स्तरीय आंदोलन करने को विवश होंगे ।
आज के इस कार्यक्रम में अजय ओड़िया, अनूप नेल्सन खलखो, उमेश मुंडा, गोविंद टोप्पो, कृष्णा लकड़ा एवं अन्य समाजसेवियों की भूमिका अहम रही।
सभी वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत हो गई है. झारखंड खतियान अधिकार आंदोलन अनवरत चलती रहेगा और 1932 के खतियान को झारखंड में लागू करवाकर रहेगी।

