एसआईआर को लेकर झामुमो का चुनाव आयोग पर हमला, पूछा– असम में क्यों नहीं लागू किया गया?
जो भाजपा को पसंद है, वही चुनाव आयोग करता है, और जो नहीं पसंद, उस पर चुप्पी साध लेता है : सुप्रियो भट्टाचार्य
गणादेश,रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुरुवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एसआईआर (सस्पेक्टेड इंडियन रिज़िडेंट्स) लागू करने के नाम पर देश में विभाजन की राजनीति की जा रही है। पार्टी के केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव आयोग ने देश के अधिकांश राज्यों में एसआईआर लागू करने की घोषणा की है, लेकिन असम को इससे बाहर रखा गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सबसे अधिक घुसपैठ असम में होती है और वह बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, तो वहां एसआईआर लागू क्यों नहीं किया गया? भट्टाचार्य ने कहा कि असम में एनआरसी प्रक्रिया का हवाला देकर आयोग ने उसे अपवाद बना दिया, जबकि वहां की स्थिति सबसे संवेदनशील है।
झामुमो नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग विशेष रूप से बंगाल को टारगेट कर रहा है, ताकि धार्मिक आधार पर मतदाताओं को वंचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि बंगाल और झारखंड के लोगों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और वैवाहिक संबंध हैं—दोनों राज्यों के खानपान, रहन-सहन और परंपराएं एक जैसी हैं। ऐसे में यह कदम आदिवासी और मूलवासी समाज के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश प्रतीत होता है। भट्टाचार्य ने कहा कि असम में लंबे समय से सांप्रदायिक और भाषाई सौहार्द को तोड़ने का प्रयास किया जाता रहा है, और यह राजनीति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सोच के अनुरूप है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मतदाताओं को चिन्हित कर वोट देने से वंचित किया गया, तो यह न केवल लोकतंत्र, बल्कि संविधान की आत्मा के लिए भी घातक होगा।



