झारखंड उलगुलान संघ ने हूंकार सभा का किया आयोजन,11 प्रस्ताव पारित
खूंटी: झारखण्ड उलगुलान संघ के तत्वावधान में मंगलवार को कचहरी मैदान में विशाल “आदिवासी न्याय उलगुलान हूंकार सभा का आयोजन 22 पड़हा कोम्पाट मुण्डा के अध्यक्ष विलियम तोपनो की अध्यक्षता में हुई। सभा का संचालन आशीष गुड़िया, मुंशी मुंडा एवं बेनेदिक्त नवरंगी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसमें खूंटी जिले के सैकड़ों गांवों के हजारों आदिवासियों की उपस्थिति में 11 प्रस्ताव पारित किया गया। आदिवासी समाज में डिलीस्टिंग जहर फैलाने का मूल लक्ष्य है पांचवी अनुसूची को समाप्त कर जमीन और जंगल पर कब्जा करना तथा आरक्षण को खत्म करना। एैसे तत्वों एवं संगठनों पर आदिवासी समाज में वैमनस्यता फैलाने को लेकर कानूनी कार्रवाई किया जाना चाहिए और उन्हें प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। आदिवासियों के सामुदायिक उपयोग की भूमि ( परती – झरती, जंगल – झाड़, गैर मजरूआ एवं गोचर जमीन) जो खतियान पार्ट टू में उल्लेखित है उसे भूमि बैंक में शामिल करना आदिवासी विरोधी सोच है, इस नीति को यथाशीघ्र रद्द किया जाए । सरना कोड नहीं देने के पीछे का षडयंत्र है आदिवासियों के अस्तित्व को नकार देना। शहरीकरण के नाम पर गाँव को लैंड-पूल के दायरे में लाने से आदिवासियों के संवैधानिक विशेषाधिकार के प्रभावित होने का खतरा है। ऑनलाइन भू-दस्तावेजों खेवट, खतियान, लगान रसीद में त्रुटि जानबूझ कर किया गया है, इसलिए सुधार को लेकर अधिकारियों में भी गम्भीरता नहीं दिखाई दे रहा है। पांचवीं अनुसूची के तहत शान्ति और सुशासन हेतु सी. एन. टी एक्ट, एस. पी. टी एक्ट एवं विल्किन्सन रूल्स तथा समता जजमेंट की मूल भावना के अनुरूप अनुसूचित क्षेत्र के प्रशासन एवं नियंत्रण की कार्यनीति सरकार को बनाना चाहिए। यू. सी. सी को थोपने का प्रयास करने वाले पार्टी एवं संगठन को सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। झारखण्ड में जातिगत जनगणना से पूर्व आदिवासी जमीन के अवैध कब्जा तथा हस्तांतरण से मुक्त किया जाए, उसके बाद जातिगत जनगणना का स्वागत किया जाएगा। वन संरक्षण संशोधन अधिनियम आदिवासियों को जंगल से अलग करने का कानून है जिससे आदिवासी समुदाय स्वत: समाप्त हो जाएंगे। ई. वी. एम से चुनाव किये जाने में निष्पक्षता का अभाव है, मतगणना के दौरान वीवीपेट पर्ची का गणना नहीं किया जाना संदेह पैदा करता है, इसलिए बैलेट पेपर से चुनाव किया जाना चाहिए ।
सभा को संयोजक अलेस्टेयर बोदरा, मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्लेडसन डुंगडुंग, सुबोध पुर्ती, अनिल वीरेन कन्डुलना, रेजन गुड़िया, दुर्गावती ओड़ेया, बैजनाथ पाहन, कुलन पतरस आईंद, शिबु होरो, पौलुस हेमरोम, दामू मुंडा, सेरेंग पतरस गुड़िया, सिरील होरो, उमल मुंडा एवं अबिसालोम सोय आदि ने सम्बोधित किया।

