क्या इस मानसून सत्र में बदलने वाली है देश की राजनीति? इतिहास के आईने में नए फैसलों की आहट
रांची: संसद का मानसून सत्र कई बार देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में बड़े बदलावों का गवाह रहा है। पिछले तीन दशकों में कई ऐतिहासिक फैसले इसी सत्र के दौरान लिए गए, जिन्होंने देश की दिशा और दशा बदल दी। ऐसे में इस बार भी राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या मौजूदा मानसून सत्र कोई बड़ा फैसला लेकर आएगा।
वर्ष 2019 में इसी सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया। वर्ष 2016 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित हुआ। 2020 में तीन कृषि कानून भी मानसून सत्र के दौरान ही पारित किए गए, हालांकि बाद में उन्हें वापस लेना पड़ा।
अगस्त 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम से जुड़े नए आपराधिक कानून संसद में पेश किए। वहीं 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करते हुए ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की, जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी।
इसी तरह शिक्षा का अधिकार कानून, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और भूमि अधिग्रहण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी मानसून सत्र में अहम प्रगति हुई। आर्थिक उदारीकरण के दौर में 1991 के बाद भारत की विकास यात्रा ने नई रफ्तार पकड़ी और आज देश विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
इस बीच सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन संसद के भीतर और बाहर जोरदार राजनीतिक हलचल देखने को मिली। दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई। छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
अब सबकी निगाहें इस मानसून सत्र पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार कौन से नए विधेयक और बड़े फैसले लेकर आती है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह सत्र भी इतिहास में दर्ज होने वाले बड़े राजनीतिक बदलावों का कारण बनेगा।


