पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का राज्य सरकार पर हमला, कहा- घोटालेबाजों को बचाने में जुटी है झारखंड पुलिस

रांची : पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि राज्य की पुलिस और एसीबी भ्रष्टाचारियों व घोटालेबाजों को बचाने का काम कर रही है। गुरुवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय रांची में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने जलापूर्ति योजना घोटाले, शराब घोटाले और ईडी की कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
मरांडी ने कहा कि शराब घोटाले में एसीबी की सक्रियता केवल “मैच फिक्सिंग” है। पहले गिरफ्तारियां की जाती हैं, फिर जानबूझकर 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, ताकि आरोपी डिफॉल्ट बेल पर बाहर आ जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि आईएएस अधिकारी विनय चौबे, सुधीर कुमार, नीरज कुमार सहित कई लोग इसी प्रक्रिया से जमानत पर छूट चुके हैं। यह सब सुनियोजित ढंग से हो रहा है।
उन्होंने कहा कि एक ओर ईडी जब अपराधियों पर कार्रवाई कर रही है, तो दूसरी ओर झारखंड पुलिस ईडी के अधिकारियों पर ही मुकदमा दर्ज कर रही है। जलापूर्ति घोटाले में संतोष कुमार के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूछताछ के बाद ईडी पर मामला दर्ज कराना और फिर पुलिस का ईडी कार्यालय पहुंच जाना, सरकार की मंशा को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए डीजीपी की नियुक्ति भी इसी उद्देश्य से की गई है कि घोटालेबाजों को संरक्षण मिले।
धुर्वा से अपहृत बच्चों की बरामदगी पर भी मरांडी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुलिस अब अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि 2 से 8 जनवरी तक बच्चे धुर्वा-हटिया क्षेत्र में ही थे और खुफिया तंत्र पूरी तरह विफल रहा। मीडिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनदबाव के कारण ही बच्चे सुरक्षित लौट पाए।
उन्होंने मांग की कि घोषित इनाम की राशि सामाजिक कार्यकर्ताओं सचिन प्रजाति, डब्लू साहू और सन्नी को दी जाए तथा सरकार उन्हें सम्मानित करे। साथ ही आशंका जताई कि पुलिस अधिकारी इनाम अपने खाते में डाल सकते हैं। ऐसा होने पर भाजपा आंदोलन करेगी।मरांडी ने कहा कि यदि पुलिस सचमुच सक्रिय होती तो राज्य के 413 बच्चे अब तक लापता नहीं रहते। उन्होंने उच्च न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेकर इन मामलों की जांच कराने और सीबीआई जांच के आदेश देने का अनुरोध किया।

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