मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने को लेकर किसानों को कराया गया एक्सपोजर विजिट

खूंटी: जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों की आजीविका वृद्धि कर सकें। इसे लेकर निरंतर प्रशिक्षण व अन्य सहयोग दिए जाने का प्रयास है। कर्रा किसान पाठशाला में किसानों को मशरूम उत्पादन को लेकर प्रशिक्षित किया गया।  ऑयस्टर मशरूम की खेती को लेकर 112 किसानों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो चुका है। 112 किसानों को ऑयस्टर मशरूम के बैग उपलब्ध कराए गए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कर्रा के कूदा, हसबेरा व कोसंबी गांव के किसान शामिल हुए।
साथ ही आज से ऑयस्टर मशरूम की खेती पर किसान पाठशाला कर्रा में 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्रशिक्षण के पहले दिन मशरूम की खेती पर 20 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें मधुगामा एवं लोयोंकेल के किसान शामिल हुए। साथ ही 40 किसानों को आज प्रशिक्षित किया गया है। 
इस दौरान बताया गया कि मशरूम की खेती अपनाने के बाद अच्छी आमदनी भी होती है। 
विशेषकर महिला किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मशरूम की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। ताकि सभी समूह की दीदियों को बेहतर विकल्प दिया जा सके। साथ ही ग्रामीण महिलाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ आर्थिक सहायता भी मुहैया करायी जा सके।
मशरूम उत्पादन की विभिन्न जानकारियों से किसानों को अवगत कराया गया है। साथ ही ऑयस्टर मशरूम की पैदावार व इससे होने वाले मुनाफे की जानकारी व इसके बाजार उपलब्धता की जानकारी भी दी गयी है।
मशरूम एक उच्च उपज और तेजी से बढ़ने वाली फसल है और पोटेशियम, लौह, प्रोटीन इत्यादि का बड़ा स्रोत है । उपलब्ध संसाधनों, विपणन अवसर इत्यादि की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए पलाश ब्रांड के तहत पैकेजिंग करने की है योजना है।
इस दौरान किसानों को कृषि गतिविधियों से जुड़ने के संबंध में जानकारी दी। किसान पाठशाला के भ्रमण के दौरान विभिन्न तकनीकों व आधुनिक खेती की जानकारी दी गई।
एक्सपोजर विजिट के दौरान बताया गया कि इसमें हॉर्टिकल्चर (उद्यान कृषि), फ्लोरीकल्चर (फूलों की बागवानी), मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, उन्‍नत एवं वैज्ञानिक कृषि और सिंचाई गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही हॉर्टिकल्चर के तहत फलदार वृक्ष (पॉमीलॉजी), विभिन्न तरह की सब्जियाें (ओलोरीकल्चर) से सम्बंधित कार्यों का अवलोकन कर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। स्ट्रॉबेरी व ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा रही है। साथ ही किसानों के लिए कृषि संबंधी कार्य को सरल व सुगम बनाने हेतु उन्हें उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाएंगे एवं उनके लिए संसाधनों की उपलब्धता को सरल किया जाएगा।
इस दौरान किसानों ने मत्स्य पालन, मुर्गीपालन, बकरीपालन, कटकनाथ मुर्गे, बतख पालन हेतु शेड का निर्माण एवं अन्य  कार्यों का अवलोकन लिया। मधुमक्खी पालन के सम्बंध में जानकारियां दी गयी।
कर्रा प्रखण्ड के समेकित आजीविका कृषि प्रणाली के भ्रमण के दौरान उन्हें कई योजनाओं के सम्बंध में भी जानकारी दी गयी।

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