आपातकाल का इतिहास भी विद्यार्थियों को पढ़ाया जाना चाहिए : रघुवर दास  

जमशेदपुर : पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आज जो पार्टी संविधान की दुहाई दे रही है, उसी कांग्रेस ने 1975 में संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए बिना कैबिनेट की मंजूरी के तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से दस्तखत करवा कर आपातकाल लागू किया था। वे बुधवार को एग्रीको स्थित अपने आवास पर पत्रकरों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक, 25 जून 1975 को देश भर में लगाए गए आपातकाल की आज बरसी है। उन्होंने मांग की कि जैसे स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास स्कूलों में पढ़ाया जाता है, वैसे ही आपातकाल का इतिहास भी विद्यार्थियों को पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी को इस देश की लोकतांत्रिक जड़ों पर हुए हमले की जानकारी हो सके।

रघुवर दास ने बताया कि इमरजेंसी के दौरान उन्हें भी जेल में रहना पड़ा था। पहले उन्हें दो महीने तक जमशेदपुर की जेल में रखा गया और फिर गया सेंट्रल जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि 12 जून 1975 को दो बड़ी घटनाएं हुईं – पहली, गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को छात्र आंदोलन के कारण हार मिली और दूसरी, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोकसभा सदस्यता को रद्द कर दिया। चुनावी भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें 6 साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया। सत्ता की कुर्सी बचाने के लिए इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया।

इसके बाद देश भर में लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का काम हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), जमात-ए-इस्लामी और आनंद मार्ग जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया और हजारों कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, चंद्रशेखर सहित सैकड़ों विपक्षी नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

जमशेदपुर में भी इस तानाशाही के विरोध में प्रदर्शन हुआ। 10 जुलाई 1975 को बसंत टॉकीज के पास छात्र प्रदर्शन पर गोली चलाई गई, जिसमें कुछ छात्र मारे गए। आज भी वहां एक शहीद स्थल मौजूद है जो उस दौर की याद दिलाता है।

रघुवर दास ने कहा कि 1977 में जब देश में चुनाव हुए तो जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया। जमशेदपुर के भालूबासा मुस्लिम बस्ती में भी कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश था और लोगों ने तानाशाही के खिलाफ मतदान किया। जेल में ही नेताओं ने मिलकर जनता पार्टी की नींव रख दी थी और चुनाव में भारी जीत के साथ देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।

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