वैश्विक आर्थिक समृद्धि का परचम लहराने वाला डीएक्सएन इंडिया मना रहा है सिल्वर जुबली

रांची : स्वास्थ्य, वैलनेस और उद्यमिता के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुके डीएक्सएन इंडिया ने मंगलवार को रांची के प्रभात तारा मैदान में अपनी सिल्वर जुबली धूमधाम से मनाई। 25 वर्ष पूरे होने के इस अवसर पर नेपाल समेत भारत के विभिन्न राज्यों से एक लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। डीएक्सएन से जुड़े लाखों परिवारों के जीवन में आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन आया है। इनमें से कई सदस्य प्रतिमाह लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, जिनमें से कई को समारोह में सम्मानित किया गया।

डीएक्सएन वैश्विक बाजार में 562 उत्पादों के साथ सक्रिय है, जिनमें न्यूट्रास्यूटिकल्स, पेय पदार्थ, कॉस्मेटिक, घरेलू उत्पाद और नैनो सॉल्यूशन शामिल हैं। कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी गैनोडर्मा, स्पिरुलिना और नोनी उत्पादक संस्थाओं में से एक है। इसके उन्नत उत्पादन केंद्र मलेशिया, चीन, मैक्सिको, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल और भारत में स्थित हैं। भारत में कंपनी ने लगभग 500 करोड़ का निवेश किया है, जबकि सिद्धिपेट, तेलंगाना में 355 करोड़ की लागत से बना आधुनिक उत्पादक केंद्र इसका प्रमुख हिस्सा है।

डीएक्सएन के संस्थापक दातू लिम सियाओ जिन ने आर्थिक विकास के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है। नालंदा विश्वविद्यालय में बख्तियार खिलजी द्वारा नष्ट किए गए बहुमूल्य ग्रंथों के मूल तथ्यों को चीन से एकत्र कर विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने का प्रयास जारी है, ताकि इसे पुनः भारत को सौंपा जा सके।

सामाजिक दायित्व के तहत कंपनी “वन डॉलर वन चाइल्ड” अभियान चला रही है। इसके माध्यम से स्पिरुलिना के जरिए एक मिलियन कुपोषित बच्चों की पोषण स्थिति सुधारने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की जा रही है।

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