झारखंड की सियासत में दो राम की चर्चा, JMM ने राज्यसभा तो भाजपा ने बनाया राज्यपाल
रांची: झारखंड की राजनीति में अनुसूचित जाति के मतदाताओं को साधने की कवायद तेज होती दिख रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लातेहार के पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजा है, वहीं भाजपा ने पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया है। दोनों नेताओं को मिली नई जिम्मेदारियों को राज्य में अनुसूचित जाति समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नजरिये से देखा जा रहा है।
पलामू प्रमंडल झारखंड की राजनीति में खास महत्व रखता है। यहां अनुसूचित जाति के मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक समय इस क्षेत्र में कांग्रेस का प्रभाव था, लेकिन वर्ष 2014 के बाद भाजपा ने यहां अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। पलामू लोकसभा सीट पर भाजपा का दबदबा बना हुआ है। ऐसे में इस क्षेत्र में अपने जनाधार को बनाए रखना और विस्तार देना राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए झामुमो भी पलामू प्रमंडल में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है। बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजने के फैसले को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। इस कदम के जरिए पार्टी ने अनुसूचित जाति समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के साथ अपने पुराने और अनुभवी नेताओं को सम्मान देने का संदेश भी दिया है।
दूसरी ओर, भाजपा ने ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाकर अपनी ओर से राजनीतिक संदेश दिया है। पार्टी इस नियुक्ति को अनुसूचित जाति समुदाय के सम्मान और प्रतिनिधित्व से जोड़कर पेश कर रही है। इससे झारखंड में दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की चर्चा भी तेज हुई है।
इस प्रकार, झारखंड की सियासत में बैद्यनाथ राम और ब्रजमोहन राम की नियुक्तियां केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। अब देखना होगा कि दोनों दलों के ये कदम पलामू प्रमंडल में उनके जनाधार और आगामी चुनावी समीकरणों को किस तरह प्रभावित करते हैं।


