कैंसर ने छीन ली सुशील कुमार मोदी की सांसें, बिहार की राजनीति के एक अध्याय का हुआ अंत

अनूप कुमार सिंह
पटना।”जिन्दगी तो बेवफा है!एक दिन ठुकराएगी!मौत महबूबा है एक दिन साथ लेकर जायेगी!”बिहार की राजनीति के बेहतरीन खिलाड़ी,जेपी आंदोलन के प्रखर सिपाही व बीजेपी के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने सबको हैरान कर दिया।लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अचानक उनका चले जाना बीजेपी में एक युग का अंत हो जाना जैसा है।सुशील मोदी अपने कैंसर की सूचना देने के 40 दिनों अंतराल में ही संसार से रुखसत हो गए। आखिर सुशील कुमार मोदी को कैंसर ने अपने आगोश में समा लिया।गौरतलब हो कि सुशील मोदी का सोमवार की रात दिल्ली के एम्स में 72 साल की उम्र में निधन हो गया।. सुशील मोदी गले के कैंसर से पीड़ित थे। यह बीमारी धीरे-धीरे उनके फेंफड़े तक पहुंच गई थी। जिसकी वजह से उन्हें बोलने में भी तकलीफ होने लगी थी।उन्होंने लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की भूमिका निभाने से साफ इनकार कर दिया था।सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा था कि वह इस बारे में पीएम मोदी को भी जानकारी दे चुके हैं।. पिछले महीने की तीन तारीख को उन्होंने कैंसर होने की जानकारी देते हुए सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा की थी। सुशील कुमार मोदी ने 03 अप्रैल को सार्वजनिक जीवन के लिए अंतिम संदेश दिया था।. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा- “पिछले छह माह से कैंसर से संघर्ष कर रहा हूं। अब लगा कि लोगों को बताने का समय आ गया है। लोकसभा चुनाव में कुछ कर नहीं पाऊंगा। प्रधानमंत्री को सब कुछ बता दिया है। देश, बिहार व पार्टी का सदा आभार व सदैव समर्पित।” यह लिखने के बाद जब सुशील मोदी बिहार आए तो एयरपोर्ट पर उनकी हालत देखते ही समर्थकों को झटका लगा था।उनका शरीर अचानक बदल गया था।बिहार में सुशील मोदी की मौत की खबर फैलते ही चारों तरफ शोक की लहर फेल गई।सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने उनके मौत पर शोक जताया है।

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