उफनते दूध से लगती है ‘हाजरी’! रामनवमी पर अनोखी आस्था का साक्षी बनता पन्नूचक शीतला मंदिर
भागलपुर। सनातन परंपराओं की धरती पर आस्था के कई ऐसे रूप दिखाई देते हैं, जो सुनने में अद्भुत और देखने में चमत्कार जैसे लगते हैं। आस्था, विश्वास और पीढ़ियों से निभाई जा रही परंपराओं का ऐसा ही अनोखा संगम देखने को मिलता है भागलपुर जिले के घोघा थाना क्षेत्र के पन्नूचक गांव स्थित शीतला मंदिर में। यहां चैत्र माह की रामनवमी के दिन एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है।उफनते दूध के साथ मन्नत मांगने की परंपरा।
हर वर्ष रामनवमी के अवसर पर दूर-दराज से सैकड़ों श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचते हैं। माता रानी के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर आने वाले श्रद्धालु पूरी नेम-निष्ठा के साथ इस परंपरा का पालन करते हैं और इसी से यह तय करते हैं कि उनकी ‘हाजरी’ माता के दरबार में लगी या नहीं।
सिर्फ महिलाएं निभाती हैं परंपरा:
इस विशेष अनुष्ठान को निभाने का अधिकार केवल महिलाओं को होता है। परंपरा के अनुसार सात जलते हुए उपले (गोईठा) पर मिट्टी के छोटे पात्र में बहुत कम मात्रा में दूध रखा जाता है।आमतौर पर एक चौथाई से भी कम।मन्नत मांगने वाली महिला करबद्ध होकर उसी पात्र के सामने बैठती है और माता रानी से अपनी मनोकामना व्यक्त करती है।
कुछ समय बाद यदि वह दूध उफनकर पात्र से बाहर गिरने लगे, तो इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि माता रानी के दरबार में उसकी हाजरी लग गई है और उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।श्रद्धालुओं का मानना है कि दूध का उफनकर गिरना माता का आशीर्वाद और मनोकामना पूरी होने का अग्रिम संकेत होता है।
पीढ़ियों से चल रही परंपरा, पर शुरुआत का पता नहीं:
श्रद्धालु मधुबाला भारती, लूसी चौधरी, कृष्णा देवी, रिंकी कुमारी, शाम्भवी कुमारी और इच्छा तृप्ति सहित कई महिलाओं का कहना है कि यह परंपरा कब और कैसे शुरू हुई, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। न ही इसका कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण मिलता है।फिर भी लोगों की गहरी आस्था इस परंपरा से जुड़ी हुई है। श्रद्धालु इसे संयोग मानें या दैवीय चमत्कार, लेकिन विश्वास यही है कि माता रानी के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।



