खूंटी में महीनों से ठप 108 एंबुलेंस सेवा, उप प्रमुख अरुण साबू ने उठाए सवाल
खूंटी: खूंटी जिले में लोगों की जान बचाने वाली आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाली को लेकर मुरहू के उप प्रमुख अरुण साबू ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में 108 एंबुलेंस सेवा पिछले कई महीनों से प्रभावित है। सेवा से जुड़े चालकों को कथित तौर पर पांच महीने से भुगतान नहीं मिलने की बात सामने आना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
अरुण साबू ने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य दुर्घटना, गंभीर बीमारी और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना है। लेकिन जब ऐसी जीवनरक्षक सेवा ही बदहाल हो जाए, तो आम जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने सेवा के संचालन और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2022 में जीवीके कंपनी ने 108 सेवा की जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में वर्ष 2025 में सेवा का संचालन दूसरी संस्था को सौंपे जाने की बात सामने आई। यदि पुरानी संस्था का काम संतोषजनक नहीं था, तो नई व्यवस्था से जनता को बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में सेवा की बदहाली और कर्मचारियों के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की अनियमितता की जांच कराने की मांग की।उप प्रमुख अरुण साबू ने कहा कि किसी भी मंत्री को विभाग की जिम्मेदारी सौंपने का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। लेकिन यदि विभागों में कर्मचारी हड़ताल पर जाने को मजबूर हों, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हों और आम जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़े, तो विभागीय जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की हड़ताल की स्थिति हो या 108 एंबुलेंस सेवा का संकट, इनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। सरकार जनता के लिए है और सरकारी विभागों का मूल उद्देश्य जनता की सेवा करना है। ऐसे में जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसकी समस्याओं का समाधान आखिर कौन करेगा।अरुण साबू ने राज्य की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि कहीं सड़क की समस्या है, कहीं पेंशन को लेकर परेशानी, कहीं आवास का लाभ नहीं मिल रहा है, तो कहीं पेयजल की व्यवस्था बदहाल है। उन्होंने महिलाओं को मिलने वाली मंईयां सम्मान योजना के भुगतान में आने वाली समस्याओं पर भी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि जनता को हर स्तर पर आश्वासन तो मिलता है, लेकिन धरातल पर सुविधाओं की स्थिति का आकलन करना जरूरी है। आम नागरिक आखिर अपनी समस्याओं को लेकर किस पर भरोसा करे? सरकार और प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
उप प्रमुख ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाली राशि के उपयोग और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद मरीजों को मिले और किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन, गैर-सरकारी संस्थाओं को दिए गए कार्यों तथा खर्च की पारदर्शिता की समीक्षा आवश्यक है।अरुण साबू ने कहा कि जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए। 108 एंबुलेंस सेवा जैसी जीवनरक्षक व्यवस्था का प्रभावित होना गंभीर मामला है। सरकार और संबंधित विभाग को तत्काल हस्तक्षेप कर सेवा बहाल करनी चाहिए, कर्मचारियों के बकाया भुगतान की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा टेंडर प्रक्रिया और संचालन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, पेंशन और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं जनता का अधिकार हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिक को इन सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी जवाबदेही से बच न सकें।


