JPSC नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, नवनियुक्त अफसरों को बड़ी राहत
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश के खिलाफ दायर अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका दाखिल करने वाले प्रार्थियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। इससे JPSC के माध्यम से चयनित होकर सरकारी सेवा में योगदान दे चुके नवनियुक्त अधिकारियों को तत्काल राहत मिली है।
मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। अदालत से राहत पाने वालों में सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी शामिल हैं। इनकी ओर से सरकार के उस फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसके तहत संबंधित परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया था।
प्रार्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत JPSC की परीक्षा दी, चयन प्रक्रिया पूरी की और उसके बाद नियुक्त होकर सरकारी सेवा में योगदान दिया। ऐसे में बाद में पूरी परीक्षा और नियुक्ति को रद्द करने के सरकार के फैसले से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
हाईकोर्ट की ओर से सरकार के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद अब इन प्रार्थियों की नियुक्तियों पर तत्काल कार्रवाई का रास्ता रुक गया है। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अभी बाकी है। अदालत के इस आदेश से उन अन्य चयनित अभ्यर्थियों में भी उम्मीद जगी है, जो सरकार के फैसले के खिलाफ न्यायालय की शरण लेने की तैयारी में हैं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों और नौकरी कर रहे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कई चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द कर निर्दोष अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जाना चाहिए। हालिया रिपोर्टों में भी नियुक्ति रद्द होने से प्रभावित अभ्यर्थियों की चिंता सामने आई है।


