52 मिनट की जंग… फिर मिली आज़ादी: तीन महीने तक तस्करों के चंगुल में कैद छात्रा को पुलिस ने छुड़ाया
भागलपुर। तीन महीने तक तस्करों के नरक में कैद रहने के बाद आखिरकार मुजफ्फरपुर की 12वीं की छात्रा को नई जिंदगी मिल गई। जिस लड़की ने गुस्से में घर छोड़ा था, वह देखते ही देखते मानव तस्करों के ऐसे जाल में फंस गई, जहां उसे पहले कोलकाता और फिर भागलपुर में बेच दिया गया। तस्कर उसे तीसरी बार बेचने की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले पुलिस ने साहसिक कार्रवाई कर उसकी जिंदगी बचा ली।
यह पूरा घटनाक्रम किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। मुजफ्फरपुर पुलिस की महिला जांच अधिकारी पूजा कुमारी अपनी टीम के साथ भागलपुर जिले के पीरपैंती थाना क्षेत्र के सिवानपुर गांव पहुंचीं। पहले करीब 35 मिनट तक इलाके की रेकी की गई। इसके बाद जैसे ही पुलिस ने संदिग्ध ठिकाने पर दबिश दी, तस्करों ने विरोध शुरू कर दिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को अपनी सर्विस पिस्टल निकालनी पड़ी। करीब 52 मिनट तक चले संघर्ष के बाद टीम ने छात्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसी दौरान नालंदा की एक अन्य किशोरी को भी तस्करों के कब्जे से मुक्त कराया गया।
गायघाट थाना क्षेत्र की रहने वाली छात्रा 10 मई को भाई की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर निकल गई थी। मुजफ्फरपुर जंक्शन पर अकेली और परेशान बैठी छात्रा को एक युवक ने नौकरी का झांसा दिया। भरोसा जीतने के बाद उसे कोलकाता ले जाया गया, जहां उसे बेच दिया गया। वहां उसके साथ मारपीट की गई, भूखा रखा गया और दवाएं देकर उसका शोषण किया गया। बाद में उसे भागलपुर लाकर फिर बेच दिया गया।
छात्रा की तलाश के लिए मुजफ्फरपुर पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) बनाई। जांच अधिकारी पूजा कुमारी लगातार सुराग जुटाती रहीं। आखिरकार एक तस्वीर से अहम लोकेशन मिली, जिसने पुलिस को सीधे भागलपुर के उस ठिकाने तक पहुंचा दिया जहां छात्रा को कैद कर रखा गया था।
साहसिक कार्रवाई के बाद पुलिस ने दोनों किशोरियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस ऑपरेशन ने न केवल एक छात्रा को तस्करों के चंगुल से आजाद कराया, बल्कि मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

