मुरहू प्रखंड में पेयजल व्यवस्था पर उठे सवाल, अधिकारियों को 15 दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश
खूंटी: मुरहू प्रखंड में भीषण गर्मी के बीच पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण इलाकों में खराब पड़े जलमीनार और चापाकल के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी रंजीत कुमार सिन्हा ने पेयजल विभाग को व्यवस्था दुरुस्त करने का सख्त निर्देश दिया है।
बीडीओ रंजीत कुमार सिन्हा ने कहा कि खराब पड़े चापाकलों और जलमीनारों की मरम्मत जल्द से जल्द की जाए। उन्होंने पेयजल विभाग को निर्देश दिया कि जल सहिया और पंचायत मुख्यालय के सहयोग से सभी खराब चापाकलों और जलमीनारों को ठीक कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि पेयजल व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही विभाग को 15 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया गया है।
भीषण गर्मी के मौसम में गांवों में पेयजल की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। ऐसे समय में जल संचय और पेयजल आपूर्ति की मजबूत व्यवस्था जरूरी है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। गर्मी बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों के साथ-साथ पशुओं को भी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मुरहू प्रखंड के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने बताया कि गांवों में कई वर्षों से लगे चापाकलों की मरम्मत तो कर दी जाती है, लेकिन पुराने और सड़े हुए पाइपों को नहीं बदला जाता। इसके कारण चापाकल कुछ ही समय में फिर से खराब हो जाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जलमीनार योजनाओं को कागजों पर पूरा दिखा दिया गया है, जबकि वास्तविकता में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है।
ग्रामीण जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई जगहों पर बोरिंग की गहराई सही तरीके से नहीं की जाती, जिससे थोड़े समय में ही पानी सूख जाता है। उप प्रमुख ने संवेदकों पर कार्य की गुणवत्ता में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी भी बोरिंग की जांच कराई जाए तो उसकी गहराई और गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिलेगी।
जिला परिषद सदस्य नेलानी देमता ने भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गनलोया बनाई नदी में बीयर बांध निर्माण के लिए टेंडर स्वीकृत होने के बावजूद अब तक काम शुरू नहीं हुआ है, जिससे जल संचय की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि मुरह प्रखंड में बने सभी जलमीनारों की जांच पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जाए और संवेदकों को भुगतान भी उसी आधार पर किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि पेयजल विभाग पूरी तरह संवेदकों के भरोसे चल रहा है, जबकि पेयजल योजनाओं के रख-रखाव की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।



