अंश-अंशिका की बरामदगी न होने पर एचईसी क्षेत्र बंद, कई बंद समर्थक हिरासत में
रांची : राजधानी रांची के मौसीबाड़ी खटाल से लापता पांच वर्षीय अंश और छह वर्षीय अंशिका का अब तक कोई सुराग नहीं मिलने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। बच्चों की सकुशल बरामदगी में हो रही देरी को लेकर लोगों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इसी आक्रोश के तहत रविवार को धुर्वा स्थित एचईसी क्षेत्र में जुलूस निकालकर बंद कराया गया। इस दौरान कई बंद समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
बंद का आह्वान पहले से किया गया था। हालांकि रविवार और वह भी दूसरा रविवार होने के कारण अधिकांश बाजार पहले से ही बंद थे। जो कुछ दुकानें खुली थीं, उन्हें बंद समर्थकों ने बंद कराया। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। बंद समर्थकों की अगुवाई राजद नेता कैलाश यादव और गौरीशंकर यादव ने की। इस दौरान सैकड़ों खटाल संचालक और स्थानीय लोग उनके साथ शामिल हुए और बाजार में घूमकर बंद कराया।
इस मौके पर कैलाश यादव ने कहा कि जिला पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता के कारण अब तक अंश और अंशिका का कोई पता नहीं चल पाया है। उन्होंने कहा कि पुलिस को जांच में तेजी लानी चाहिए और इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं गौरीशंकर यादव ने कहा कि यदि किसी बड़े नेता या पूंजीपति का बच्चा गायब होता, तो पूरा तंत्र उसे खोजने में जमीन-आसमान एक कर देता। लेकिन गरीब मां-बाप के बच्चों के मामले में पुलिस का रवैया उदासीन है। इस भेदभाव को समाप्त करते हुए दोनों बच्चों को जल्द से जल्द ढूंढा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि अंश और अंशिका दो जनवरी से एचईसी के शालीमार बाजार क्षेत्र से लापता हैं। इसके बाद से परिजन स्थानीय थाना से लेकर जिला एसपी और राज्य के डीजीपी तक आवेदन देकर बच्चों की सकुशल बरामदगी की गुहार लगा चुके हैं। बीते दिनों शहीद चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया था, वहीं शनिवार की देर शाम मशाल जुलूस भी निकाला गया। बच्चों के लापता हुए अब दस दिन होने को हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है।
उधर, इस मुद्दे पर भाजपा को भी राज्य सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। भारतीय जनता पार्टी ने जिला प्रशासन को बच्चों की बरामदगी के लिए सोमवार तक का समय दिया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय तक बच्चे नहीं मिले, तो मंगलवार को एसएसपी कार्यालय का घेराव किया जाएगा और इसके बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



