अब स्वास्थ्य और तंदुरूस्ती से जुड़े विज्ञापनों में तय की जाएगी जवाबदेही
सविन्द्र कुमार सिंह
गया,भारत देश में हेल्दी डाइट, सप्लीमेंट फूड, स्वास्थ्य और शक्ति वर्धक दवाओं का बहुत बड़ा बाजार है।यह बाजार पूरी तरह विज्ञापनों पर आधारित है। इन उत्पादों का कंपनियों के द्वारा विशेषकर बड़े बड़े सेलिब्रिटीज़, इनफ्लूएंसर और वर्चुअल इनफ्लूएंसरों के माध्यम से हजारों करोड़ के कारोबार प्रतिवर्ष किए जाते हैं। तमाम नियमों के बावजूद इनमें कई उत्पादों के विज्ञापन भ्रामक और सच से परे पाए जाते हैं।
इसी भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए केन्द्र सरकार ने अतिरिक्त दिशानिर्देश जारी किया है।
यह दिशा-निर्देश 9 जून 2022 को जारी भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के लिए समर्थन हेतु दिशानिर्देश 2022 का एक महत्वपूर्ण विस्तार हैं।
जारी दिशानिर्देशों का उद्देश्य भ्रामक विज्ञापनों, निराधार दावों से निपटना और स्वास्थ्य और तंदुरूस्ती के समर्थन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। दिशानिर्देशों के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्रमाणित चिकित्सकों, स्वास्थ्य और फिटनेस विशेषज्ञों को जानकारी साझा करते समय उत्पादों या सेवाओं को बढ़ावा देने या स्वास्थ्य संबंधी कोई भी दावा करते समय यह बताना होगा कि वे प्रमाणित स्वास्थ्य/फिटनेस विशेषज्ञ और चिकित्सा व्यवसायी हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सा व्यवसायी के रूप में प्रस्तुत करने वाली सेलिब्रिटिज़, इनफ्लूएंसर और वर्चुअल इनफ्लूएंसर को जानकारी साझा करते समय उत्पादों या सेवाओं को बढ़ावा देते समय या कोई स्वास्थ्य संबंधी दावे करते समय स्पष्ट डिस्क्लेमर देना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि देखने या पढ़ने वाले उपभोक्ता यह समझें कि उनकी पुष्टि को पेशेवर चिकित्सा सलाह,
निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
यह डिस्क्लोजर या डिस्क्लेमर तब आवश्यक है जब खाद्य पदार्थों और न्यूट्रास्यूटिकल्स से प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ, बीमारी की रोकथाम, उपचार या इलाज, चिकित्सा स्थितियों, स्वास्थ्य लाभ के तरीकों या प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने आदि जैसे विषयों पर विज्ञापनों के माध्यम से दावा किया जाए। यह डिस्क्लोजर या डिस्क्लेमर किसी वस्तु का समर्थन, प्रचार का माध्यम चाहे कुछ भी हो।
केंद्र ने स्वास्थ्य और तंदुरूस्ती से जुड़े सेलिब्रिटिज़, इनफ्लूएंसर और वर्चुअल इनफ्लूएंसर के लिए अतिरिक्त प्रभावशाली दिशानिर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) सहित सभी हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार किया हैं।

