कालजयी गीतकार गोपाल सिंह नेपाली की जयंती पर रचनाकारों की श्रद्धांजलि

गणादेश बेतिया:पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया के उद्भट साहित्यकार, कवि एवं गीतों के राजकुमार कविवर गोपाल सिंह नेपाली की जयंती पर गुरुवार को नगर के कविवर नेपाली पथ, पुराना बस स्टैंड स्थित नेपाली स्मारक, नेपाली चौक पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। बेतिया के रचनाकर्मियों, साहित्यप्रेमियों ने नेपाली चौक स्थित नेपाली स्मारक पर गोपाल सिंह नेपाली की प्रतिमा स्थल की सफ़ई किया। कवियों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों एवं पत्रकारों ने ‘मेरी दुल्हन सी रात को नौ लाख सितारों ने लूटा बदनाम रहे बटमार, घर तो रखवालों ने लूटा’ के कालजयी कवि की प्रतिमा को माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। कार्यक्रम में उपस्थित रचनाधर्मिता से जुड़े लोगों ने गोपाल सिंह नेपाली के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी रचना कालजयी हैं, घर तो रखवारों ने लूटा,वर्तमान व्यवस्था पर प्रहार है। अफसोस नहीं इसका हमको, जीवन में हम कुछ कर न सके। झोलियाँ किसी की भर न सके, संताप किसी का हर न सके। अपने प्रति सच्चा रहने का जीवन भर हमने काम किया। देखा-देखी हम जी न सके, देखा-देखी हम मर न सके। ‘मेरा धन है स्वाधीन कलम’, ‘तुम कल्पना करो, नवीन कल्पना करो’, ‘हिन्दी है भारत की बोली’, ‘मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे’ जैसी कालजयी रचनाओं को याद कर, दुहरा कर कवि-साहित्यकारों ने नेपाली को श्रद्धांजलि अर्पित किया। उपर्युक्त जयंती कार्यक्रम में डॉ. परमेश्वर भक्त, प्रो. कमरुज्जमां कमर, सुरेश गुप्त, अरुण गोपाल, अखिलेश्वर मिश्र, ललन पाण्डेय लहरी, आभास झा ‘युवा’, जयकिशोर जय, जगत भूषण राज, डाॅ. दिवाकर राय, डाॅ. राजेश कुमार चंदेल, डाॅ.ज्ञानेश्वर गुंजन, डॉ. जगमोहन कुमार, ज्योति प्रकाश, पाण्डेय धर्मेन्द्र शर्मा, समाजसेवी सह साहित्यप्रेमी बिहारी लाल प्रसाद उर्फ लाल दरोगा महतो, अनील कुमार, राम कुमार, पवन राज, महेन्द्र चौधरी शामिल हुए।

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