केंद्र-राज्य के पेंशन के फेर में मुरहू प्रखंड के लगभग 3500 बुजुर्ग, को अप्रैल 26 से नहीं मिली केंद्र की पेंशन: अरुण साबू
खूंटी। मुरहू प्रखंड में पेंशन पर निर्भर हजारों बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग लाभुकों को इन दिनों केंद्र और राज्य सरकार की पेंशन व्यवस्था के बीच तकनीकी अड़चन का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कई पेंशनधारी हाथों में डंडा लेकर बैंक और प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
मुरहू के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने बताया कि कई बुजुर्ग उनके कार्यालय पहुंचकर पेंशन नहीं मिलने की अपनी पीड़ा बता रहे थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने जानकारी और जांच-पड़ताल की। इसमें सामने आया कि मुरहू प्रखंड में लगभग 10,700 पेंशनधारी हैं, जिनमें करीब 3,500 लाभुकों को केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन का लाभ मिलता है, जबकि लगभग 7,000 लाभुक राज्य सरकार की पेंशन योजना से जुड़े हैं।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार की पेंशन का भुगतान अगस्त 2026 तक किया जा चुका है, लेकिन केंद्र सरकार की हिस्सेदारी वाली पेंशन का भुगतान अप्रैल 2026 तक ही हुआ है। इसके बाद से करीब 3,500 लाभुक केंद्र की पेंशन राशि का इंतजार कर रहे हैं।
पोर्टल में बदलाव बना परेशानी का कारण
जिला स्तर से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से पेंशन भुगतान के लिए नया पोर्टल/नई व्यवस्था लागू की गई है। इसी प्रक्रिया के कारण केंद्र की राशि के भुगतान में विलंब हो रहा है। बताया गया है कि नई व्यवस्था को लेकर सितंबर माह में प्रशिक्षण दिया जाना है। प्रशिक्षण और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबित केंद्र की पेंशन राशि का भुगतान एकमुश्त किए जाने की संभावना है।
‘हमें तकनीकी समस्या से क्या मतलब, हमें तो पेंशन चाहिए’
पेंशनधारियों का कहना है कि पोर्टल बदला है या भुगतान की प्रक्रिया में तकनीकी समस्या है, इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। सरकार की योजना के तहत उन्हें पेंशन मिलनी है और उसी राशि से वे अपने दैनिक जीवन का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में महीनों तक पेंशन नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
उप प्रमुख अरुण साबू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की प्रक्रिया के बीच सबसे ज्यादा परेशानी उन बुजुर्गों को हो रही है, जिनके लिए पेंशन ही आर्थिक सहारा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से लंबित पेंशन का भुगतान जल्द कराने की मांग की है, ताकि बुजुर्गों को बैंक और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
केंद्र और राज्य की व्यवस्था के बीच करीब 3,500 पेंशनधारी फिलहाल अपनी बकाया राशि का इंतजार कर रहे हैं।


