दुर्गोत्सव : श्रीदुर्गा अष्टमी पर आज होगी महागौरी की पूजा, सुहागिनें करेंगी सोलह श्रृंगार

चतरा (गणादेश) : नवरात्रि की अष्टमी तिथि के दिन जगत जननी दुर्गा माता के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा करने का विधान है। इस दिन विधिवत तरीके से महागौरी की पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। देवी महागौरी के गौर वर्ण के कारण उनकी तुलना शंख, चन्द्रमा तथा कुन्द के श्वेत पुष्प द्वारा की जाती है। माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ अर्थात् बैल इनकी सवारी है। इसी कारण उन्हें श्वेताम्बरधरा के नाम से भी जाना जाता है। देवी महागौरी को चतुर्भुज रूप में दर्शाया गया है। वह अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं तथा दूसरे दाहिने हाथ को अभय मुद्रा में रखती हैं। एक हाथ में डमरू धारण करती हैं तथा दूसरे बायें हाथ को वर मुद्रा में रखती हैं। मान्यता है कि मां भगवान शिव के पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कारण इनका शरीर श्याम वर्ण की हो गया। भगवान शिव ने गंगा जल छिड़क कर इनका अभिषेक करके पुनः गौरव प्रदान किया था। इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। विवाह में आ रही रुकावट को दूर करने के लिए महागौरी की पूजा काफी लाभप्रद माना गया है। जो सुहागिनें माता गौरी की पूजा करती है उन्हें अखंड सौभाग्य का फल मिलता है।

महागौरी की पूजा का शुभ मुहूर्त;ब्रह्म मुहूर्त 04:37 से 06:25 तक।
अभिजित मुहूर्त 11:47 से 12:35 बजे तक।
विजय मुहूर्त 02:10 से 02:58 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त 06:08 से से 07:32 बजे तक।

महागौरी का प्रिय भोग:महागौरी को नारियल काफी पसंद है। आप नारीयल से बनी चीजें भी चढ़ा सकते हैं। इसके अलावा हलवा, पुआ का भोग भी लगाया जाता है।

माता गौरी का प्रिय पुष्प व रंग:माता गौरी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। आप माता को सफेद रंग के पुष्प चढ़ाएं। मां को रात की रानी का फूल प्रिय है। नवरात्रि की अष्टमी पर गुलाबी व लाल रंग के कपड़े पहनना शुभ रहेगा।

महा गौरी की पूजा विधि:सुबह उठकर स्नान करें और मंदिर साफ करें।दुर्गा माता का गंगाजल से अभिषेक करें। मैया को अक्षत, लाल चंदन, चुनरी और लाल पुष्प अर्पित करें। सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक कर फल, फूल और तिलक लगाएं। प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं। घर के मंदिर में धूपबत्ती और घी का दीपक जलाएं। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।फिर पान के पत्ते पर कपूर और लौंग रख माता की आरती करें।अंत में क्षमा प्रार्थना करें।

महागौरी के मंत्र

सर्व मंगल मांगल्य शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण त्र्यंबकमके गौरी नारायणी नमस्ते।।

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