हाथ बदलेगा हालात या कमल पर लोग करेंगे भरोसा,हाल रांची संसदीय चुनाव का…
रांची: रांची संसदीय सीट पर चुनाव प्रचार का कार्य थम गया है। यहां पर 25 मई यानी शनिवार को मतदान होना है। इस सीट पर 27 प्रत्याशी मैदान में हैं।लेकिन मुख्य मुकाबला पंजा और कमल में होना है। रांची सीट पर यशस्विनी सहाय को टिकट मिलने पर एनडीए खेमे में प्रत्याशी से लेकर कार्यकर्ता इस जंग को आसान समझ रहे थे। उन्हें लगने लगा कि अब तो बीजेपी के प्रत्याशी घर में बैठे भी रहेंगे तो भी जीत सुनिश्चित है। लेकिन नामांकन के बाद जब चुनाव प्रचार के दौरान हालात से सामना करना पड़ा तो जमीनी हकीकत सामने आने लगी। इसके बाद यह जंग चुनौतीपूर्ण लगने लगा। इंडी गठबंधन की प्रत्याशी यशस्विनी सहाय नामांकन के बाद लगातार अबतक सभी प्रखंड सहित कई गांवों का दौरा कर चुकी हैं। महिला प्रत्याशी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का अधिक समर्थन मिला है। यही नहीं युवा मतदाताओं का भी मन बदलने में यशस्विनी सहाय बहुत हद तक कामयाब हुई हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में यशस्विनी को रिस्पॉन्स मिला है। वहीं शहरी क्षेत्रों में एनडीए प्रत्याशी संजय सेठ को लोगों का रिस्पॉन्स मिला है। खासकर व्यापारी और बुद्धिजीवी वोटरों का पीएम मोदी पर लोगों का भरोसा है। वहीं शहरी क्षेत्रों में डेली कमाने खाने वाले लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर क्या हो रहा है,उससे कोई मतलब नहीं है,वे बढ़ती महंगाई और कम आमदनी से परेशान हैं। इस टाइप के वोटर अंतिम समय में किधर भी जा सकते हैं। यानी की कोर वोटर संजय सेठ के पक्ष में नहीं दिख रहा है। हालांकि कभी कभी ईवीएम का बटन दबाने से पहले लोगों का मन बदल जाता है।
वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो बीजेपी वाले इस बार जीत के प्रति ओवर कॉन्फिडेंस में हैं। इसलिए चुनाव प्रचार भी सभी पंचायत और गांव में मन से नहीं किया गया। चुनाव प्रचार गाड़ी के भरोसे छोड़ दिया गया। ग्रामीणों के विरोध के कारण चुनाव प्रचार वाहन कई गांवों में तो गया ही नहीं। यही नहीं कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले खर्च में भी कटौती की गई। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल कम हुआ।वहीं एनडीए प्रत्याशी संजय सेठ ने भी चुनाव प्रचार में काफी मेहनत की है।
इंडी गठबंधन प्रत्याशी यशस्विनी युवा हैं और पहली बार चुनाव लड़ रही है तो उनमें जोश अधिक दिखा। कार्यकर्ताओं से अधिक प्रत्याशी में अधिक जोश था। प्रियंका गांधी के रांची में चुनावी सभा के बाद माहौल यशस्विनी के पक्ष में हो गया है। अब यह वोटों में कितना तब्दील होता है यह तो चार जून को ही पता चल पाएगा।

