पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री पूजा

रुपेश कुमार मिश्र
गणादेश बथनाहा:आज सोमवती अमावस्या के साथ साथ वट सावित्री व्रत पूजन भी है।पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री नामक एक महिला पतिव्रता थी ।उसके पति सत्यवान कुष्ठ रोगी और अल्पायु थे।अतः यमराज उसके प्राण हरण कर जब जाने लगा तो अपनी पतिव्रत धर्म और बुद्धिमत्ता से न केवल अपने पति की प्राण बचाई अपितु अपने अंधे सास ससुर को नेत्र ज्योति सहित राजपाठ और पौत्र प्रपोत्र सुख भी मांग ली।
उसी दिन से ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत पूजन का विधान है।सधवा महिला अपने पति की लंबी आयु हेतु इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करती हैं। अमावस्या से एक दिन पूर्व ही चतुर्दशी तिथि से नहाय खाय के साथ व्रत का प्रारंभ हो जाता है।अगले दिन प्रचलित विधान के अनुसार महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं। विधान के अनुसार कम से कम पांच प्रकार के फल से पूजन का विधान है। पूजन बाद सूर्योदय से पूर्व ही बिना नमक का शुद्ध और सात्विक भोजन करती है।तत्पश्चात पानी तक ग्रहण नहीं करती है। यही विशेषता है भारतीय संस्कृति की एक तरफ़ पर्व के माध्यम से परिवार को जोड़ कर रखती है तो दूसरी तरफ बरगद जैसे विज्ञान महत्व के वृक्ष के साथ साथ फलदार वृक्षों के संरक्षण करने पर जोर देती है।

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