दो कांवरिया गंगा में डूबे, सुलतानगंज घाट पर हंगामा, NH-80 जाम

भागलपुर।श्रावणी मेले के दूसरे दिन शनिवार को सुलतानगंज स्थित गंगा घाट पर दो कांवरियों की डूबने से मौत हो गई। हादसे के बाद मेला क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और आक्रोशित कांवरियों ने सुलतानगंज-भागलपुर मुख्य मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग-80) को जाम कर दिया। इसके चलते घंटों तक आवागमन ठप रहा और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शन कर रहे कांवरियों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था का आरोप लगाया। नाराज श्रद्धालुओं ने सुलतानगंज के अंचलाधिकारी (सीओ) का घेराव कर नारेबाजी की। इस दौरान कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण भी हो गई।डूबे कांवरिया की पहचान पश्चिमी चंपारण जिले के तमकुहा गांव निवासी गोविंद गुप्ता (पिता: नगीलाल गुप्ता) के रूप में हुई है। वहीं डूबे आपदा मित्र की पहचान शाहाबाद गांव (थाना सुलतानगंज, जिला भागलपुर) निवासी पप्पू शर्मा के पुत्र अभय राज (उम्र 23 वर्ष) के रूप में की गई है।

     प्राप्त जानकारी के अनुसार, नमामि गंगे घाट पर ड्यूटी के दौरान एक आपदा मित्र डूब गए, जबकि कमरगंज घाट पर स्नान के दौरान पश्चिमी चंपारण जिले का एक कांवरिया गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना के बाद से दोनों के शवों की तलाश जारी है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। कांवरियों का आरोप है कि एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमें मौके पर समय से नहीं पहुंचीं और खोजबीन में भारी लापरवाही बरती गई। इस कारण लोगों का आक्रोश भड़क उठा।

    घटना की जानकारी मिलते ही सुलतानगंज के अंचलाधिकारी रवि कुमार, स्थानीय विधायक ललित नारायण मंडल और थानाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और नाराज कांवरियों को समझाने-बुझाने की कोशिश की। हालांकि लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।डूबे कांवरिया की पहचान पश्चिमी चंपारण जिले के तमकुहा गांव निवासी गोविंद गुप्ता (पिता: नगीलाल गुप्ता) के रूप में हुई है। वहीं डूबे आपदा मित्र की पहचान शाहाबाद गांव (थाना सुलतानगंज, जिला भागलपुर) निवासी पप्पू शर्मा के पुत्र अभय राज (उम्र 23 वर्ष) के रूप में की गई है।

परिजनों का आरोप:
डूबे युवकों के परिजनों का कहना है कि प्रशासन को सूचना देने के बाद भी काफी देर तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। मृतकों के स्वजन और स्थानीय कांवरियों ने यह भी आरोप लगाया कि खतरनाक घाटों को चिन्हित कर उचित बैरिकेडिंग नहीं की गई थी, जिससे यह दुखद घटना हुई।

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था:
इस हादसे ने श्रावणी मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांवरियों और मृतकों के परिजन प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि शवों की जल्द बरामदगी सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

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