मशरूम उत्पादन कर आदिवासी महिलाएं आत्मनिर्भर बनेगी -:सच्चिदानंद
जामताड़ा: झारखंड ट्राईबल डेवलपमेंट सोसायटी द्वारा आयोजित मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जामताड़ा जिला के जिला परियोजना प्रबंधक सच्चिदानंद ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कम पूंजी कम लागत और कम स्थान में मशरूम का उत्पादन कर आदिवासी महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती है। उन्होंने मशरूम उत्पादन के तरीकों पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि मशरूम में पाए जाने वाले औषधीय पदार्थ सभी के लिए लाभदायक है सब्जी के साथ साथ स्वास्थ्य वर्धक होने के कारण बच्चे महिला और पुरुष इसके खाने से स्वस्थ रहेंगे और कई बीमारियां इससे दूर होगी। उन्होंने कहा कि संचालित फर्म एपीपी एग्रीगेट खूंटी आपके द्वारा उठ जाएगा फसल और उसे निर्मित सामग्री बड़ी पापड़ अचार आदि का निर्माण कर उसका बाजारीकरण में आपको सहायता करेगी ।
एपीपी एग्रीगेट खूंटी झारखंड के निदेशक प्रभाकर कुमार ने कहा कि मशरूम उत्पादकों को हर तरह की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुट्टी काटने की मशीन और फल को सुखाने के लिए सोलर ड्रायर भी समूह को उपलब्ध कराई जाएगी जिस से लगातार स्वरोजगार और उत्पादन का कार्य निरंतर चलता रहेगा इसके साथ ही समय-समय पर क्षेत्र भ्रमण निरीक्षण उचित सलाह और कार्यों की समीक्षा भी कराई जाएगी। इस अवसर पर मशरूम उत्पादन से संबंधित बेरोजगारी दूर करेंगे बीमारी दूर करेंगे तर्ज पर गाया गया गीत लोकगीत पर लाभार्थियों ने शानदार आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति जामताड़ा जिले के फतेहपुर प्रखंड लकड़चीपा गांव में किया। प्रशिक्षका पूनम संगा ने कुट्टी फुलाने के तरीके और कैमिकल की मात्रा पर विस्तार से चर्चा की।
दूसरी ओर रामपुर चक में एपीपी एग्रीगेट खूंटी के राज्य प्रमुख अनमोल कुमार ने मशरूम उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की । प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विषयों पर समूह चर्चा एवं प्रतिभागियों द्वारा चर्चा की प्रस्तुति विस्तार से की गई । कार्यक्रम में स्वयंसेवक बालिका मुर्मु नमिता किस्कू मैं संथाली भाषा में मशरूम उत्पादन के तरीकों को विस्तार से बताया और प्रायोगिक तौर पर कुट्टी पुराने के तरीके और उस में डाले जाने वाले केमिकल की मात्रा को विस्तार से बताते हुए प्रशिक्षणार्थियों से प्रायोगिक तौर पर उसे कर कर बताया गया ।

