खूंटी की जंग इस बार पहले से टफ,अर्जुन मुंडा के लिए आसान नहीं…
खूंटी: भाजपा ने एक बार फिर से खूंटी संसदीय सीट पर अर्जुन मुंडा को ही टिकट दिया है। जबकि कुछ दिन पहले तक कई तरह की चर्चा सियासी बाजार में हो रही थी। लेकिन फाइनली अर्जुन मुंडा को 2024 का लोकसभा चुनाव खूंटी सीट से ही लड़ना होगा। यहां पर उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस और झामुमो से होने वाला है। पिछली बार भी यही हुआ था और वे हारते हारते जीत गए। वहीं महागठबंधन ने अबतक प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं किया है। वैसे यह सीट कांग्रेस का है।लेकिन जेएमएम इसपर दावेदारी कर रहा है। खूंटी सीट यदि कांग्रेस को मिला तो पूर्व प्रत्याशी कालीचरण मुंडा को टिकट मिल सकता है। वैसे हाल में कांग्रेस में शामिल समजेविका दयामनी बराला को भी इस सीट पर महागठबंधन प्रत्याशी बना सकता है। खूंटी संसदीय सीट पर 1984 तक कांग्रेस का कब्जा था। लेकिन 1989,1996,1999में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा से कड़िया मुंडा ने लगातार पांच बार जीत हासिल की। 2004, 2009 और 2014 में भी कड़िया मुंडा ने ही जीत हासिल की। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर कड़िया मुंडा की जगह अर्जुन मुंडा को उतारने का फैसला लिया और मुंडा ने इस सीट पर जीत हासिल किया। अब फिर से लोकसभा चुनाव का माहौल बन गया है। अर्जुन मुंडा फिर से एक बार खूंटी के मैदान में उतर गए हैं। खूंटी के सियासी बाजार का माहौल भी बदलने लगा है। इस बार वोट कटवा के तौर पर झारखंड पार्टी भी मैदान में रहेगा।
वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो खूंटी संसदीय क्षेत्र में ईसाई की संख्या अच्छी खासी है। ये लोग निर्णायक वोटर कहे जाते हैं। यदि कांग्रेस ने दयामनी बारला को टिकट दे दिया तो अर्जुन मुंडा के लिए जीतना मुश्किल हो सकता है। ईसाई वोटर भाजपा को वोट नहीं करते हैं। भाजपा को सरना आदिवासी और मूलवासी वोट करते हैं। लेकिन उसमे भी यदि महागठबंधन सेंधमारी करने में सफल रहा तो अर्जुन मुंडा के लिए मुश्किल हो सकता है।

