झारखंड कैडर के आइएएस अफसरों की आरोपों और विवादों की लंबी होती जा रही फेरहिस्त
जांच के घेरे में हैं सीएस से लेकर डीसी रैंक तक के अफसर
कभी अपने में उलझे, तो कभी सरकार से ठनी
बिना सूचना के साल भर से अधिक समय तक गायब रहे अफसर
रांची: झारखंड कैडर का आईएएस महकमा भी विवादों से अछूता नहीं रहा है। कभी अपने में उलझे तो कभी सरकार से भी ठनी। वहीं सरकार ने कई मामलों पर ब्यूरोक्रेसी पर शिकंजा भी कसा। अब राजभवन ने भी भ्रष्टाचार के दायरे में आए अफसरों की सूची मांगी है। वहीं राज्य गठन के बाद से मंत्रियों की शिकायत रही कि सचिव उनकी बातों को नहीं सुनते। दो मंत्री भी विभागीय सचिव से आमने-सामने हो गए।
विवादों और जांच के दायरे में रहे आइएएस अफसर
1990 बैच के अफसर आलोक गोयल पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा था। उनके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी भी की गई थी। ऑडिट रिर्पोट भी केंद्र को भेजी गई थी। पूजा सिंह को चतरा और खूंटी डीसी रहते हुए वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा। लेकिन बाद में इस मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल गई। रमेश घोलप और आकांक्षा रंजन पर सरायकेला-खरसांव में हुए मॉब लिंचिंग की घटना के बाद निलंबन करने की अनुशंसा तक की गई। बाद में दोनों को निलंबन मुक्त कर दिया गया। बोकारो के तत्कालीन डीसी अरवा राजकमल के खिलाफ विभाग जांच की प्रक्रि्य़ा शुरू की गई।
डॉ कुलकर्णी और मनीष रंजन हो चुके हैं आमने-सामने
झारखंड कैडर को दो अफसर आमने-सामने भी हुए। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त डॉ नितिन मदन कुलकर्णी व हजारीबाग के तत्कालीन डीसी मनीष रंजन के बीच भी विवाद रहा। मामला राजभवन तक पहुंचा।
आइएएस ज्योत्सना को करना पड़ा बर्खास्त
राज्य की पहली महिला आईएएस अफसर ज्योत्सना वर्मा रे बर्खास्त करना पड़ा। वह मनीला में विश्व बैंक में प्रतिनियुक्ति में थीं. प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद भी वह वहीं बनी रहीं। रिमांडर के बाद भी उन्होंने कोई सूचना नहीं दी।
अरूण कुमार सिंह से भी स्पष्टीकरण
अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर अरूण कुमार सिंह पर देवघर जमीन घोटाला मामले में स्पष्टीकरण भी पूछा गया। वर्तमान में अरूण कुमार सिंह स्वास्थ्य विभाग में अपर मुख्य सचिव हैं।
बर्खास्त होने से बचे बाघमारे
एक साल से ड्यूटी से गायब रहने वाले आईएएस अफसर बाघमारे प्रसाद कृष्णा भी विभागीय कार्रवाई में दोषी पाये गये। इसके बाद राज्य सरकार ने भारत सरकार को वाघमारे कृष्णा प्रसाद के डीम्ड रेजिगनेशन का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और राज्य सरकार को वापस भेज दिया। इसके बाद उन्होंने योगदान भी दिया।
मनोज कुमार के सीआर पर प्रतिकूल टिप्पणी
गैर सेवा से आईएएस बने मनोज कुमार जांच के दायरे में आए। इनके सीआर पर भी प्रतिकूल टिप्पणी भी की गई। 2003 से 2009 तक का सीआर एक ही बार दे दिया। नियमत: हर साल सीआर देने का प्रावधान है। यही नहीं 2003-09 तक का जो सीआर मनोज कुमार ने दिया, वह सिर्फ एक ही पन्ने का था। एक ही तारीख में यह सीआर बनाकर दिया गया।
केके खंडेलवाल अपर मुख्य सचिव
अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर केके खंडेलवाल के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो बिहार, पटना में निगरानी जांच संख्या एएस 01/99 के तहत विभिन्न आरोपों में लंबित होने की सूचना है. इस संदर्भ में अद्यतन स्थिति प्राप्त करने के लिए ब्यूरो द्वारा पुलिस अधीक्षक निगरानी ने अन्वेषण ब्यूरो पटना से 13 बार पत्राचार किया है, लेकिन अद्यतन स्थिति प्राप्त नहीं हो पाई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक केके खंडेलवाल के खिलाफ बिहार में वर्ष 1999 में मामला दर्ज है.
मनोज कुमार भी जांच के दायरे में
मनोज कुमार जब नगर निगम में जब मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर थे, उस समय इनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो झारखंड रांची में पीइ संख्या 17/15 अंकित थी इनके के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के लिए उनके प्रशासी विभाग के प्रधान सचिव को ब्यूरो द्वारा चार मई 2017 को ही लिखा गया है.
रांची डीसी छवि रंजन भी जांच दायरे में
रांची डीसी छवि रंजन के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो झारखंड में निगरानी थाना कांड संख्या 76/15 दिनांक 25.12.2015 दर्ज किया गया है. अनुसंधान के बाद मामले में आरोप पत्र 26 अक्तूबर 2016 को न्यायालय में समर्पित किया गया है.
सरकार से भी आमने सामने हुए हैं अपसर
सीएमओ और एसके सत्पथी के बीच ठनी
21 खनिज खदानों के रद्द करने के मामले में तत्कालीन खान सचिव एसके सत्पथी अड़े रहे. सीएमओ ने कई बार खदानों के लीज नवीनीकरण के लिये कमेटी बनायी. सभी ने रद्द करने की अनुशंसा की। इससे बाद फिर से खान विभाग पर समीक्षा के लिये दबाव बनाया गया. खान सचिव अड़े रहे और 18 खनिज खदानों के लीज रद्द करने की अनुशंसा कर दी। .
पूर्व कृषि मंत्री और कुलकर्णी हो गए आमने-सामने
मंत्रियों की भी आपत्ति रही कि सचिव उनकी बातों को नहीं सुनते हैं। पूर्व कृषि मंत्री रंधीर सिंह और तत्कालीन कृषि सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी के बीच ठनी। कृषि की कई योजनाओं को जल्द से जल्द लागू कराने को लेकर दोनों के बीच नहीं बनी। इस कारण कुलकर्णी को बदल दिया गया।
पूर्व मंत्री चंद्रप्रकाश और एपी सिंह के बीच नहीं बनी
पूर्व पेयजल मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी और तत्कालीन पेयजल सचिव एपी सिंह के बीच ठनी रही। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को लेकर मंत्री ने कई बार पीत पत्र भी लिखा। इसके बाद एपी सिंह को दूसरे विभाग का सचिव बनाया गया।
सीएमओ और रहाटे भी हुए आमने सामने
अडाणी पावर के बिजली देने के मामले में तत्कालीन ऊर्जा सचिव एसकेजी रहाटे और सीएमओ आमने-सामने हो गए। इसके बाद रहाटे एक माह की छुट्टी पर चले गए। फिर उन्हें ऊर्जा से हटाकरश्रम विभाग में तबादला कर दिया गया।श्रम विभाग से हटाकर उन्हें गृह विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गई थी
आइएएस सुनील कुमार और श्रीनिवासन के खिलाफ सबूत नहीं
आइएएस सुनील कुमार और के श्रीनिवासन के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। इन दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो झारखंड रांची में पीई संख्या 17/12 दर्ज थी. झारखंड उच्च न्यायालय रांची के आदेशानुसार समान मामले में ब्यूरो में 10 कांड अंकित हुए. इनमें के श्रीनिवासन और सुनील कुमार नामजद अभियुक्त नहीं हैं और न ही अनुसंधान के क्रम में दोनों के विरुद्ध कोई साक्ष्य प्राप्त हुए हैं.

