गंगा की मौत, अब जैविक उद्यान में नहीं गूंजेगी दहाड़े
बोकारो। एकलौती गंगा नहीं रही। अब उसकी दहाड़े हमेशा के लिए शांत हो गई हैं। हम बात कर रहे हैं बाघिन गंगा की। शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। जवाहर लाल नेहरू जैविक उद्यान बोकारो वितरण करने वाली गंगा की मौत के बाद उद्यान सूना हो गया है। वह लंबे अर्से से बीमार चल रही थी। गंगा का जन्म आठ अगस्त 2006 को छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुई थी। वहां कुछ दिन रहने के बाद उसे बोकारो लाया गया। गंगा की मौत के बाद अब चिड़िया खाने में न तो बाघ बचे हैं और न ही शेर ।

