नासोफारिंगल एंजियोफाइब्रोमा का सर्जरी अब राजधानी रांची के अरुणिषा हॉस्पिटल में भी संभव
रांची : मनुष्य का आंख, कान और नाक यानी ईएनटी बहुत कोमल होता है। इसकी स्थिति बिगड़ने से मानव लाचार हो जाता है।
इसके इलाज में काफी रुपए खर्च हो जाते हैं। बड़े बड़े शहरों में तो उसका इलाज संभव है। लेकिन छोटे शहरों में काफी खर्च के बाद भी स्थिति में समुचित सुधार नहीं हो पाता है।लेकिन रांची के का कांटाटोली स्थित अरुणिषा ईएनटी हॉस्पिटल में भी कान संबंधित गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है। अरुणिषा ईएनटी हॉस्पिटल के डॉ अरुण कुमार ने बताया कि उन्होंने जुवेनाइल नासोफारिंगल एंजियोफाइब्रोमा बीमारी से एक मरीज ग्रसित था। वह रांची के कई अस्पताल में इलाज कराने के लिए गया था। रिम्स में भी इलाज कराने के उद्देश्य से गया। लेकिन उसका वहां ऑपरेशन नहीं किया। उसको सलाह दी गई कि इस बीमारी का इलाज मुंबई और वेल्लोर जैसे बड़े शहरों में ही संभव है। मरीज के लोग बहुत ही गरीब परिवार से हैं। उनके लिए यह संभव नहीं था। डॉक्टर अरुण कुमार ने कहा मैंने इस मरीज को स्वीकार कर इसके ट्यूमर का 9 घंटे की सर्जरी से सफलतापूर्वक सीमित साधनों के साथ इलाज पुरा किया ।इस ट्यूमर का इलाज जटिल होने का कारण खून की नली से जुड़ी ट्यूमर का होना है जो कि SPHENOPALANTINE FOSSA से उत्पत्ति होती है। मरीज को काफी परेशानी हो सकती है इसका इलाज केवल ऑपरेशन से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि आजकल सभी मोबाइल का अधिक उपयोग करते हैं। जरूरी बातें करने के लिए तो ठीक हैं।लेकिन घंटों मोबाइल को कान में लगाकर बातें करने से कान के पर्दा को नुकसान होता है। किसी किसी मरीज का कान का नस सुख जाता है। इसके बाद उसे सुनाई पड़ना कम हो जाता है ।कम उम्र में तो सर्जरी से ठीक हो सकता है।लेकिन आशिक उम्र होने पर मसीन के अलावा कोई चारा नहीं होता है। इसके आलावा तीव्र ध्वनि यंत्र का इस्तेमाल या उसके पास जाने से बचना चाहिए।

