सिदो–कान्हु के वंशजों पर लाठी चार्जसे शहीदों का अपमान : सुदेश महतो
रांची। आजसू पार्टी प्रमुख एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने भोगनाडीह की घटना पर राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। श्री महतो ने कहा कि भोगनाडीह में सिदो–कान्हु के वंशजों और ग्रामीणों को शहीद स्थल पर पहुंचने से रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल से शहीदों का अपमान हुआ है। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार ने यह साबित कर दिया कि झामुमो अपने स्वार्थ के लिए सिदो–कान्हु के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करना चाहता है। क्या इसी दिन के लिए शहीदों ने बलिदान दिया था?
श्री महतो ने रांची में सिदो–कान्हु की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद मीडिया से कहा कि राज्य सरकार लाठी–डंडे के जोर पर काम करना बंद करे और हूल के यथार्थ को समझने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि सरकार को हूल के मूल आधार को समझना पड़ेगा। क्या हम जल, जंगल और जमीन तथा झारखंडी अस्मिता को बचा पा रहे हैं? अगर हेमंत सोरेन में राजनीतिक इच्छाशक्ति और क्षमता है, तो कोशिश करना चाहिए कि हूल के मूल को स्थापित करने की चेष्टा करें।
हूल पर सिर्फ झामुमो का नहीं
है एकाधिकार : देवशरण भगत
डॉ देवशरण भगत ने कहा कि हूल पर सिर्फ राज्य सरकार या झामुमो का एकाधिकार नहीं है। जानकारी मिली है कि सिदो–कान्हु के वंशजों मंडल मुर्मू के नेतृत्व में वहां पहुंचे ग्रामीणों को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा लाठी चार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले बरसाए गए, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आदिवासियों की भावना का
सम्मान नहीं : प्रवीण प्रभाकर
झारखंड आंदोलनकारी प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों की भावनाओं का सम्मान नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले रांची में फ्लाईओवर मुद्दे पर आदिवासियों का दमन हुआ और अब भोगनाडीह में लाठीचार्ज किया गया है। झामुमो का आदिवासी विरोधी चरित्र सामने आ गया है।
आजसू पार्टी ने राज्य भर में किया
हूल के नायकों सिदो–कान्हु को नमन
रांची। आजसू पार्टी ने पूरे राज्य में जिला स्तर पर हूल दिवस मनाया। मुख्य कार्यक्रम रांची के सिदो–कान्हु पार्क में हुआ, आजसू प्रमुख सुदेश महतो आजसू नेताओं के साथ भारी बारिश के बीच सिदो–कान्हु पार्क पहुंचे और माल्यार्पण किया। उनके साथ मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत, झारखंड आंदोलनकारी प्रवीण प्रभाकर, हसन अंसारी, राजेंद्र मेहता, जिप अध्यक्ष श्रीमती निर्मला भगत समेत कई नेताओं ने भी माल्यार्पण किया।
इस अवसर पर सुदेश महतो ने कहा कि हूल विद्रोह केवल आदिवासी समाज का आंदोलन नहीं था, बल्कि यह देश में आजादी की लड़ाई का पहला शंखनाद था। उन्होंने कहा कि वीर सिदो-कान्हू के नेतृत्व में हज़ारों संताल क्रांतिकारियों ने अपनी शहादत दी और यह विद्रोह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी क्रांतियों में से एक है जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
श्री महतो ने आगे कहा कि आज का समय है जब हम सबको एकजुट होकर एक नयी सामाजिक और राजनीतिक चेतना को जन्म देना है। इसके लिए एक और हूल की आवश्यकता है। वीर शहीदों के सपनों का झारखंड अब भी अधूरा है। इसलिए जरूरत है कि हम सब मिलकर एक नयी हूल क्रांति की नींव रखें, जो स्वशासन, सामाजिक न्याय और समृद्धि पर आधारित हो।
ये थे उपस्थित
इस अवसर पर बनमाली मंडल, नईम अंसारी, दीपक महतो, हरीश कुमार, ओम वर्मा, बबलू महतो, ऋतुराज शाहदेव, राजेश सिंह, डॉ पार्थ परितोष, देवाशीष चट्टोराज, कुमोद वर्मा, ज्योत्सना केरकेट्टा, शत्रुघ्न महतो, रमेश भगत , लाडले खान, सज्जाद आलम, चिंटू मिश्रा, मुकेश नायक, रौशन मुंडा, सुरेंद्र लिंडा, महादेव मुंडा, संजय नायक, आशीष पाठक, राकेश सिंह, अनिल गुप्ता, दया शंकर झा, योगेंद्र उरांव, कौशल तिवारी, अभिषेक नायक, चेतन प्रकाश, अजीत कुमार, आतिश महतो, उज्वल महतो, गजाधर महतो, अभय कुमार, संजीव कुमार, अमित कुमार, सुमित कुमार और पिंकू कुमार, प्रशांत कुमार, अमन साहू, रवि रोशन, प्रियांशु, हिमांशु, ओम प्रकाश शुक्ला, सोनल राज दुबे, सौरभ यादव, ऋषभ, अंगद महतो आदि उपस्थित रहे।



