एनजीटी के निर्देश पर राज्य की उच्च स्तरीय टीम पहुंची साहिबगंज
साहिबगंज: जिले में अवैध खनन के खिलाफ दायर याचिका को लेकर एनजीटी के निर्देश पर राज्य सरकार की गठित उच्चस्तरीय टीम सोमवार को साहिबगंज पहुंची। ठीक सुबह 9 बजे हेलीकॉप्टर से अपर मुख्य सचिव एल ख्यांगते, खान सचिव अबु बकर सिद्दकी, वन विभाग के सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव वाई के दास यहां पहुंचे। इसके बाद टीम ने सर्किट हाउज़ पहुंच कर पदाधिकारियों के साथ मंत्रणा की। इसके बाद टीम डीसी रामनिवास सहित ज़िला प्रशासन के पदाधिकारियों व रेलवे के पदाधिकारियों के साथ शहर के रेलवे जेनरल इंस्टीयूट के पीछे स्थित मार्शलिंग यार्ड पहुंचे। टीम ने रेलवे के मार्शलिंग यार्ड का निरीक्षण किया। इस दौरान उच्चस्तरीय टीम ने मारीकुटी स्थित स्टार स्टोन वर्क्स क्रशर प्लांट को सील कर दिया। बताया जा रहा है कि टीम ने कई खदानों को भी तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है। इसके बाद टीम महादेवगंज व मिर्जाचौकी भी गई और क्रशर व खदानों का निरीक्षण किया। देर शाम उच्च अधिकारियों ने प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कई आवश्यक निर्देश दिया।
टीम यहां के क्रशरों व पत्थर खदानों की रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी प्रधान बेंच नई दिल्ली में 27 फरवरी को होने वाली सुनवाई के पूर्व दाखिल करेगी।
गौरतलब हो कि राजमहल पहाड़ी को बचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अरशद नसर ने 2017 में एनजीटी में याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई के सिलसिले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने विशेषज्ञों की एक टीम साहिबगंज भेजी गई थी। उन्होंने यहां प्रदूषण की स्थिति को काफी गंभीर पाया। पीएम-10 का स्तर सामान्य रूप से 100 के आसपास रहना चाहिए था जो 217 पर पहुंच गया था। जिसके बाद टीम ने जिले को 130 ग्रिड में बांटकर अध्ययन किया। एक ग्रिड चार वर्ग किलोमीटर का था। ग्रिड एक, तीन, चार व सात की स्थिति भयावह पाई गई। यहां सामान्य से ज्यादा पत्थर गिट्टी का दोहन हो रहा। एनजीटी कोर्ट ने जनवरी 2023 तक कार्रवाई करने का आदेश सरकार को दिया था। उसी आलोक में अपर मुख्य सचिव एल ख्यांगते की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया। मामला सामने आने के बाद डेढ़ दर्जन से अधिक पत्थर खदानों की लीज रद की गई है। कई क्रशरों को बंद कराया गया है।

