सरहूल पूजा मानव को प्राकृतिक के प्रति प्रेम एवं संरक्षण करवाने की ओर प्रेरित करती है : कालीचरण मुंडा

खूंटी: खूंटी संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा और सिमडेगा विधायक भूषण वाड़ा तीन दिवसीय दौरे पर गुरुवार को खूंटी लोकसभा अंतर्गत पालकोट प्रखंड में सरहूल महोत्सव में शामिल हुए। प्रत्याशी कालीचरण मुंडा और सिमडेगा विधायक भूषण वाड़ा का ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति रिवाज से स्वागत किया। प्रत्याशी कालीचरण मुंडा ने पालकोट प्रखंड वासियों को सरहूल, नवरात्री और ईद की शुभकामनाएं दी। सरहूल महोत्सव पर कालीचरण मुंडा ढोल नगाड़े पर जमकर थिरके। सरहूल महोत्सव को संबोधित करते हुए कालीचरण मुंडा ने कहा की सरहुल महोत्सव हमारी पौराणिक संस्कृति को दर्शाती है। जरूरत है हमे इसे संजोने की। इस पर्व के माध्यम से हमें प्रकृति की महत्व को समझते है। सरहुल आदिवासी समाज का पारंपरिक पर्व है। यह पर्व आदिवासी समाज द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी मनाते आ रहे है। आज के इस आधुनिक युग में इस पर्व को बचाए रखना हम सभी का परम कर्तव्य है। इसमें युवाओं की भूमिका अहम रहेगी।
उन्होने आगे कहा की हमें गर्व है कि हम प्राकृतिक उपासक हैं। हमारा धर्म अति प्राचीन एवं विज्ञान पर आधारित है। हमारा आदिवासी धर्म दर्शन सर्वोत्तम है। हमारी धार्मिक, समाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक मान्यताएं एवं परंपराएं प्रकृति के नियमानुसार बनें हैं। सरहूल पूजा मानव को प्राकृतिक के प्रति प्रेम एवं संरक्षण करवाने की ओर प्रेरित करती है।
मौके पर डेविड तिर्की, विकास कुमार गुप्ता, वीरेंद्र तिर्की, बसंत गुप्ता, प्रदीप केसरी आदि महागठबंधन के कार्यकर्ता शामिल थे।

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