राजद जांच टीम पहुंची घटनास्थल, पीड़ित परिवार से शामियाने के नीचे ली जानकारी

भागलपुर। जिले के नवगछिया स्थित एनएच-31 किनारे तुलसीपुर बहियार में 18 जून को एक महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद होने के मामले में मंगलवार को राजद की नौ सदस्यीय प्रदेश जांच टीम गांव पहुंची। यह टीम नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के निर्देश पर गठित की गई थी।

हालांकि, जांच टीम घटनास्थल पर जाने के बजाय मृतका के घर के समीप शामियाना लगाकर पीड़ित परिवार से जानकारी जुटाती रही। टीम के रवैये पर ग्रामीणों और परिजनों ने नाराज़गी जताई और इसे “रस्मी कार्रवाई” करार दिया।

गंभीर मामले में सरकारी जांच जैसी औपचारिकता :

राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल के नेतृत्व में पहुंची टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. कांति सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदयनारायण चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. तनवीर हसन, पूर्व मंत्री बीमा भारती, महासचिव बीनू यादव, कुमारी अनिता, मदन शर्मा और अरुण यादव शामिल थे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महिला के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई, लेकिन जांच टीम का रवैया इस भयावह घटना के प्रति असंवेदनशील दिखा।

गुड्डू को गिरफ्तार करो, नहीं तो एनएच जाम होगा :

ग्रामीणों ने गुड्डू नामक व्यक्ति पर संदेह जताया और चेतावनी दी कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो एनएच-31 को जाम कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। टीम की ओर से आश्वासन दिया गया कि दोषी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन स्थानीयों का कहना है कि अब तक सिर्फ बयानबाज़ी हुई है, कार्रवाई नहीं।

थानाध्यक्ष पर लापरवाही का आरोप :

स्थानीय थाना पुलिस पर भी ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि थानाध्यक्ष ने मामले को लेकर कोई तत्परता नहीं दिखाई और अब तक जाँच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। ग्रामीणों ने टीम से निष्पक्ष पुलिस जांच और त्वरित न्याय की माँग की।

प्रेस कांफ्रेंस नहीं, भोज में लगी रही टीम :

मीडिया से बातचीत के लिए टीम को दयालपुर चौक स्थित एक होटल में आमंत्रित किया गया था, लेकिन वहां प्रेस कांफ्रेंस के बजाय भोज का आयोजन देखने को मिला। मीडिया प्रतिनिधियों को कोई जानकारी दिए बिना लौटा दिया गया। गाँव में भी पत्रकारों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। कई पत्रकारों ने बताया कि कुछ नेताओं ने उनसे बदसलूकी भी की, जिससे मीडिया समुदाय में नाराजगी देखी गई।

टिकट की राजनीति या न्याय की लड़ाई :

बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चाहत रखने वाले कई स्थानीय नेताओं ने जांच टीम के स्वागत-सत्कार और खान-पान की विशेष व्यवस्था की थी। वहीं, पीड़ित परिवार और पत्रकारों के लिए कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या नेताओं की प्राथमिकता न्याय है या टिकट की राजनीति।

सवाल अब भी कायम :

जहां एक ओर महिला की निर्मम हत्या से क्षेत्र में शोक और आक्रोश है, वहीं राजद जांच टीम की सतही कार्रवाई ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस पहल होती है या नहीं।

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