पूर्व सीएम के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू,पीएम मोदी, राज्यपाल संतोष गंगवार ने दुख व्यक्त किया
रांची : झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन का आज यानी सोमवार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे झारखंड में शोक की लहर है। वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, झरखड़ के राज्यपाल संतोष कूमर गंगवार सहित कई राजनेताओं ने दुख व्यक्त किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासियों के प्रणेता का आज अंत हो गया। ईश्वर उनको श्री चरणों में जगह दे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिबू सोरेन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें एक ऐसे जनमानव नेता बताया जिसने जनता के साथ स्थायी जुड़ाव रखकर आदिवासी व वंचित वर्गों के उत्थान के लिए जीवन समर्पित किया। उन्होंने परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना जताते हुए ओम शांति” कहा।
झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शिबू सोरेन के निधन पर दुख व्यक्त किया। साथ ही कहा कि उनके निधन जनजातीय में पीड़ादायक है। जनजातीय के वे ससक्त स्वर थे। एक आंदोलनकारी और संघर्षशील थे।
पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा कि शिबू सोरेन का बहुत संघर्ष से उठे थे। उनका पूरा जीवन संघर्षमय रहा है। आदिवासी होते हुए भी वे शाकाहारी थे। शिबू सोरेन एक समाज सुधारक एक आंदोलनकारी नेता के रूप में जाने जाएंगे। रघुवर दास ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री काल में मुझे मंत्री बनाने का मौका मिल था। गरीब और आदिवासी लोगों का जीवन स्तर ऊंचा करने की हमेशा वे बात करते थे, आदिवासी,गरीब ब बच्चों को पढ़ाने के लिए रात्रि पाठशाला खुलबने काम किया था। उनको झारखंड ही नहीं पूरा देश हमेशा याद करता रहेगा।
झारखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने दुख व्यक्त करते हुए कहा आज पूरा झारखंड शोक की लहर मे डूबा है। उनकी कमी हमेशा खलेगी। मैंने अपना गार्जियन खो दिया है। ईश्वर उन्हें शरीचारणों में स्थान दे।
झारखंड सरकार में श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव ने दुख व्यक्त करते बहुए कहा कि शिबू सोरेन मेरे पिता के समान थे,हमेशा मार्गदर्शन करते थे।
मंत्री ने कहा कि शिबू सोरेन आदिवासियों के बीच एक समाज सुधार का कार्यक्रम चलाया। आदिवासी बच्चों को रात्रि पाठशाला का आयोजन किया था। उन्हे रात में पढ़ाते थे। आदिवासियों के बीच शिबू सोरेन भगवान की तरह थे। शिबू सोरेन तीन बार मुख्यमंत्री बने लेकिन उन्होंने काभी कार्यकाल पूरा नहीं किया।
शिबू सोरेन हमेशा समाजहित में काम करते थे। 1980 में वे चुनाव हारे, 1998 में भी चुनाव हारे थे। सात बार दुमका लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने का काम किया है। झारखंड आंदोलन के इतिहास में शिबू सोरेन का नाम सुनहरे शब्दों में लिखा जाएगा।



