पटना डीएम ने धांधली के आरोप में अंचल लिपिक व राजस्व कर्मचारी को किया निलंबित
अनूप कुमार सिंह
पटना।राजधानी पटना में दाखिल खारिज व अन्य कार्यों में भ्रष्ट अफसरों व कर्मचारियों की अब खैर नहीं!जी हां पटना डीएम डॉ. चन्द्रशेखर सिंह द्वारा एक राजस्व कर्मचारी व एक अंचल लिपिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पटना सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी शशि शंकर व लिपिक संजीत कुमार को दाखिल खारिज में धांधली, जनकार्यों के प्रति असंवेदनशीलता व लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है।गौरतलब हो कि पटना डीएम ने सख्त निर्देश दिया था कि राजस्व मामले में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।शनिवार को जिलाधिकारी ने कहा कि पटना सदर अंचल अन्तर्गत ऑनलाईन दाखिल-खारिज वादों के निष्पादन में अनियमितता बरतने के संदर्भ में सूचना प्राप्त हुई थी। जाँच के क्रम में पाया गया कि पटना सदर अंचलान्तर्गत मौजा-संदलपुर, थाना नं0-2/11, वार्ड सं0-16/22, म्यू0 प्लॉट नं0-34 एवं 36 से संबंधित दाखिल-खारिज सं0-15324/2020-21 एवं 116178/2022-23 में दिनांक-20.07.2021 व 14.09.2023 को आवेदक के पक्ष में संदर्भित भूखण्ड के दाखिल-खारिज की स्वीकृति दी गयी है। पुनः उपरोक्त वर्णित म्यूनिसिपल प्लॉट नं0-34 एवं 36 से संदर्भित भूखण्ड के दाखिल-खारिज हेतु आवेदिका रूणा देवी द्वारा दाखिल-खारिज वाद सं0-114063/2022-23 दाखिल किया गया था।जिसे संबंधित राजस्व कर्मचारी शषि शंकर के द्वारा यह उल्लेखित करते हुए कि ‘‘आवेदित भूमि गैरमजरूआ आम खाते की है। अस्वीकृति हेतु अनुषंसा की गयी। जिसके आलोक में -23.05.2023 को दाखिल-खारिज वाद सं0-114063/2022-23 को अस्वीकृत कर दिया गया।
उक्त के आलोक में प्रष्नगत मामले की विस्तृत अभिलेखीय जाँच हेतु अंचलाधिकारी, पटना सदर को निर्देशित किया गया। अंचलाधिकारी, पटना सदर द्वारा अभिलेखीय जाँचोपरान्त प्रतिवेदित किया गया कि दाखिल-खारिज वाद सं0-114063/2022-23 के निष्पादन में शषि शंकर, राजस्व कर्मचारी द्वारा म्युनिसिपल खेसरा का सत्यापन खतियान से नहीं किया बल्कि म्युनिसिपल खेसरा को CS खेसरा मानते हुए उसका गलत प्रतिवेदन दिया गया है। सरकारी भूमि के संबंध में भी स्पष्ट जाँच नहीं गई है।वहीं अस्वीकृति हेतु अनुशंसित किया गया है। पुनः आवेदक अभिषेक सिंह व अन्य द्वारा शषि शंकर, राजस्व कर्मचारी, पटना सदर के विरूद्ध दाखिल-खारिज व परिमार्जन संबंधी मामलों के निष्पादन में मनमानी व लापरवाही बरतने संबंधी आवेदन प्राप्त हुआ। जिसके आलोक में जिलाधिकारी द्वारा अपर समाहर्त्ता, अंचलाधिकारी, पटना सदर व राजस्व कर्मचारी शषि शंकर की उपस्थिति में आवेदन पत्र में वर्णित मामले की जाँच की गयी। जाँचोपरान्त पाया गया कि आवेदक भोला प्रसाद के द्वारा छुटी हुई जमाबंदी को ऑनलाईन किये जाने संबंधी आवेदन समर्पित किया गया था। जिसमें वांछित प्रस्ताव अंचलाधिकारी, पटना सदर द्वारा 28.11.2023 को भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, पटना सदर को अनुशंसा के साथ अग्रसारित किया गया। तदोपरान्त भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, पटना सदर द्वारा उक्त प्रस्ताव दिनांक 06.03.2024 को अग्रेतर कार्रवाई हेतु अंचल कार्यालय को वापस किया गया। परन्तु शषि शंकर द्वारा चार माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। वहीं
आवेदक सुधीर कुमार राय द्वारा दिनांक 03.11.2023 को परिमार्जन हेतु आवेदन समर्पित किया गया था। जिसका निष्पादन अबतक संबंधित राजस्व कर्मचारी शषि शंकर द्वारा नहीं किया गया है। आवेदक मीना प्रसाद द्वारा दिनांक 01.04.2024 को दाखिल-खारिज हेतु ऑनलाईन दाखिल-खारिज वाद समर्पित किया गया था।जिसमें अबतक संबंधित राजस्व कर्मचारी शषि शंकर द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आवेदिका उषा कुमारी द्वारा मापी हेतु आवेदन समर्पित किया गया था।जिसके आलोक में अंचल कार्यालय, पटना सदर में मापी वाद सं0-08/2023-24 संधारित किया गया था।परन्तु संबंधित राजस्व कर्मचारी शषि शंकर द्वारा प्रतिवेदन समर्पित नहीं किये जाने के कारण उक्त मापी वाद को अबतक निष्पादित नहीं किया जा सका है।
जिलाधिकारी ने कहा कि उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में शषि शंकर, राजस्व कर्मचारी, पटना सदर को बिहार सरकारी सेवक आचारण नियमावली-1976 के नियम 3(i)(ii)(iii) के तहत लापरवाही, कर्त्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता व अनुशासनहीनता का दोषी पाते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(i) मे निहित प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
*लिपिक संजीत कुमार के विरूद्ध आरोप**
. जिलाधिकारी ने कहा कि संजीत कुमार का यह कृत्य उनकी गलत मंषा, सरकारी कार्याें के प्रति लापरवाही, कर्त्तव्यहीनता, स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है।
डीएम ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कहा कि सरकारी कार्यों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसा करने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मियों के विरूद्ध जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए विधि-सम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी पदाधिकारी जनहित के कार्यों के प्रति संवेदनशीलता प्रदर्शित करें। पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के साथ आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन करें।

