शिलापट पर सिर्फ ‘मैं’ ही मैं, चुनावी मौसम में, विधायक जी का ‘नाम चमकाओ अभियान’
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर: चुनावी मौसम है जनाब! वादों की बारिश हो रही है, उद्घाटनों की बाढ़ आई हुई है, और नेताओं को शिलापट पर नाम छपवाने की ऐसी लत लग गई है कि जैसे मानो वोट नहीं, पत्थर से निकलते हैं।
ताजा मामला पीरपैंती नगर पंचायत का है, जहां भाजपा विधायक ललन कुमार ने विकास योजनाओं से ज्यादा नाम की राजनीति पर फोकस कर दिया है। मामला एक नाले के निर्माण का है – जिसकी लागत ₹65.94 लाख है, और जो मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत स्वीकृत हुआ है। लेकिन असली ड्रामा शुरू होता है उद्घाटन के दौरान!
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही शिलापट आया, विधायक जी ने प्रोटोकॉल को एक तरफ रख दिया और कहा – “नाम होगा तो सिर्फ मेरा!” और फिर क्या था – नारियल फूटा, फीता कटा, लेकिन शिलापट पर बाकी जनप्रतिनिधियों के नाम गायब।
प्रोटोकॉल गया नाले में!
शिलापट पर ना सांसद का नाम, ना नगर पंचायत अध्यक्ष का जिक्र – सिर्फ विधायक जी की “झलक”। विभाग के एसडीओ अखिलेश प्रसाद ने भी हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने दो टूक कहा, “हमने सबका नाम डालने को कहा था, लेकिन विधायक जी ज़िद पर अड़े रहे – बोले सिर्फ मेरा नाम रहेगा। अब बताइए हम क्या करें?”
सोशल मीडिया पर चमकता ‘शुभारंभ’
उधर विधायक जी ने इस एकपक्षीय उद्घाटन को लेकर फेसबुक पर भावुक पोस्ट भी ठोक डाली। विकास की बातें, जनता की सेवा, और जल-जमाव से मुक्ति जैसे भारी-भरकम शब्दों के बीच नाम-प्रेम का कोई जिक्र नहीं था। पोस्ट पढ़कर लगता है मानो वे अकेले ही विकास की पतवार संभाले हुए हैं।
जनता पूछे – यह कैसा विकास, जहां शिलापट पर भी लोकतंत्र की गूंज नहीं? सवाल यह है कि क्या चुनावी मौसम में हर उद्घाटन का मतलब सिर्फ “नाम चमकाओ अभियान” है? क्या प्रोटोकॉल सिर्फ किताबों के लिए रह गया है?
विकास योजनाओं पर सबका हक है – लेकिन शिलापट पर सिर्फ एक नाम देख कर बाकी प्रतिनिधि, जनता और लोकतंत्र – तीनों खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।



