आरक्षण के सवाल पर बोले नीतीश कुमार, गलत बोल रहे भाजपा नेता

गणादेश ब्यूरो
पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नगर निकायों में आरक्षण के सवाल पर भाजपा नेता गलत बोल रहे हैं। हमलोगों ने सभी पार्टियों से विचार-विमर्श कर वर्ष 2008 में इसे लेकर कानून बनाया था। वर्ष 2000 में जब राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थीं, तो उन्होंने ओबीसी को आरक्षण दिया था। उस कानून को कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बाद 2005 में जब हमलोग सरकार में आए तो सभी की राय से ईबीसी को आरक्षण दिया। नीतीश ने कहा कि यह हमलोगों को व्यक्तिगत फैसला नहीं था, सभी की राय से निर्णय लिया गया था। उस समय भाजपा भी साथ थी। वर्ष 2006 के पंचायत चुनाव के बाद 2007 में नगर निकायों में इसे लागू किया गया। इस कानून के खिलाफ कई लोग हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट गए लेकिन उनकी याचिका को कोर्ट ने अस्वीकृत कर दिया। इस कानून के आधार पर चार बार पंचायत तथा तीन बार नगर निकायों का चुनाव कराया जा चुका है। बिहार में ओबीसी और ईबीसी की बात काफी पुरानी है। सबसे पहले 1978 में जब कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने ईबीसी को आरक्षण का लाभ दिया था। कोई अन्य राज्य सरकार अगर आज इसे कर रही है तो इससे क्या मतलब है? बिहार में तो यह 1978 से ही लागू है। एनडीए की सरकार में नगर विकास विभाग किसके जिम्मे था? कुछ लोग रोज बोलते रहते हैं ताकि दिल्ली वाले उनकी मदद कर दें। भाजपा जब-जब साथ थी। नगर विकास विभाग उनके जिम्मे रहा। बिहार के ईबीसी में अल्पसंख्यक समाज के लोग भी शामिल हैं। बिहार सरकार इस बारे में कोर्ट से अनुरोध करेगी कि पूरी बात को देख लीजिए। इस कानून को पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से मान्यता है तो फिर नई बात कैसे की जा रही?
नीतीश ने कहा कि विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी का नाम लिए बगैर कहा कि कुछ लोग पहले राजद, फिर जदयू और अब भाजपा में शामिल हुए तो क्या-क्या बोलते रहते हैं? उनके पिता को हमलोगों ने समता पार्टी में इज्जत दी थी? जिनके लिए हमने बहुत कुछ किया है, वे उसे भूल जाते हैं।

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