ठंड को मात देती खुशियों के बीच नए साल का आगाज़,अलविदा 2025… उम्मीदों के साथ 2026 का स्वागत
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। पछुआ हवा की तेज सरसराहट और हाड़ कंपा देने वाली ठंड भी नए साल के जश्न के आगे बौनी साबित हुई। बीते 31 दिसंबर की आधी रात जैसे ही घड़ी की घंटा, मिनट, सेकेंड की सुइयों ने एक-दूसरे से आलिंगन की, वैसे ही पूरे अंग क्षेत्र में जश्न का सैलाब उमड़ पड़ा। पटाखों की गूंज से आसमान दहल उठा और हर जुबां पर एक ही स्वर था— ‘हैप्पी न्यू ईयर’। अलविदा 2025…. स्वागतम 2026…। साल को विदाई और नए साल 2026 के स्वागत में शहर से लेकर गांव तक के लोग उल्लास व उमंग के तरंगों में झूमते दिखे।
भोर होते ही ठंड की परवाह किए बिना लोग परिवार और मित्रों के साथ नए साल की पहली सुबह को यादगार बनाने निकल पड़े। ऊनी कपड़ों में लिपटे बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी के चेहरों पर उत्साह और आंखों में नई उम्मीदें थीं। भागलपुर और आसपास के प्रसिद्ध पर्यटन व पिकनिक स्थलों पर दिन भर चहल-पहल बनी रही।
नववर्ष पर अंग क्षेत्र के लोगों की पहली पसंद एक बार फिर ऐतिहासिक विक्रमशिला महाविहार रहा। यहां दिन भर श्रद्धालुओं और सैलानियों का तांता लगा रहा। अनुमान के अनुसार करीब 40 हजार से अधिक लोगों ने इस ऐतिहासिक धरोहर पर पहुंचकर नए साल का जश्न मनाया। इसके अलावा बांका का ओढ़नी डैम, मंदार पर्वत, कहलगांव के गंगाधार पर स्थित तीनपहाड़ी, महर्षि मेंही आश्रम, लाजपत पार्क और गंगा में नौका विहार के दौरान उछलती-कूदती गांगेय डॉल्फिन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। हर ओर कैमरे क्लिक करते रहे, सेल्फी और समूह तस्वीरों के साथ यादें संजोई जाती रहीं।
नए साल के मौके पर धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बूढ़ानाथ मंदिर, अजगैबीनाथ धाम, बाबा बटेश्वरनाथ, भद्रेश्वर पहाड़ी, शांति धाम, एनटीपीसी का शिवा-शिव मंदिर सहित अन्य देवालयों में पूजा-अर्चना का दौर दिन भर चलता रहा। गंगा तटवासी और दूर-दराज से आए श्रद्धालु पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर नववर्ष की मंगल कामना करते दिखे। कहलगांव, बाबा बटेश्वर की नगरी और सुल्तानगंज क्षेत्र में उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान के लिए ग्रामीणों की खास भीड़ रही।
लाजपत पार्क से क्रूज तक, बच्चों की मस्ती चरम पर
सिल्क सिटी के लाजपत पार्क, महर्षि मेंही आश्रम और विक्रमशिला तक चलने वाले क्रूज में भी रौनक बनी रही। गंगा में डॉल्फिन की अठखेलियां देखकर बच्चे खुशी से झूम उठे। लाजपत पार्क में बच्चों की खिलखिलाहट और खेल-कूद ने माहौल को और जीवंत कर दिया।
नववर्ष के जश्न को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। विभिन्न पिकनिक स्थलों और मुख्य मार्गों पर दंडाधिकारी व पुलिस बल की तैनाती की गई थी। स्थानीय पुलिस के साथ शेरनी दल और सीआईएटी के जवानों की लगातार गश्त से असामाजिक तत्वों की गतिविधियां न के बराबर रहीं। नतीजतन लोग बेफिक्र होकर नए साल का आनंद ले सके।
कुछ युवाओं की टोलियां नए साल पर लंबी यात्राओं के लिए भी निकल पड़ीं। निजी और प्राइवेट वाहनों से मोती झील (साहिबगंज), सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और मां तारा के दर्शन के लिए रवाना होते युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। वहीं बांका के बौंसी स्थित मंदार पर्वत पर अमृत मंथन स्थल तक पहुंचने के लिए लोगों ने ऊंची चढ़ाई तय की और मंदार झील में स्नान कर आनंद उठाया। इसके साथ बाबा बासुकीनाथ व बाबा बैद्यनाथ के दर्शन – पूजन भी भक्तों ने किए।
कुल मिलाकर, ठंड पर भारी उमंग और उल्लास के साथ अंग क्षेत्र यानी सिल्क सिटी ने 2026 का स्वागत किया – नई उम्मीदों, नई शुरुआत और खुशहाल भविष्य की कामना के संग।



