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भागलपुर में हाई कोर्ट खंडपीठ की मांग पर उबाल: सड़क पर उतरे वकील

@ बोले – कभी दार्जिलिंग तक हमारा अधिकार था।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। लंबे समय से ठंडी पड़ी हाई कोर्ट खंडपीठ की मांग बुधवार को फिर गर्म हो गई। भागलपुर के अधिवक्ता इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर आए और शहर की गलियों में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के नारे खूब गूंजे। कचहरी परिसर से शुरू हुआ उनका जुलूस समाहरणालय, मनाली चौक, तिलकामांझी होते हुए वापस कोर्ट परिसर लौटा। काली कोट और सफ़ेद पट्टी पहने बड़ी संख्या में वकील हाथों में तख्तियां लिए ‘खंडपीठ दो – न्याय भरो’ जैसे नारों के साथ आगे बढ़ते रहे।

‘हमारा न्यायिक इतिहास बहुत बड़ा रहा है’

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमनाथ ओझा ने मार्च के दौरान कहा कि भागलपुर का न्यायिक भूगोल बेहद विस्तृत रहा है। उन्होंने याद दिलाया – ‘एक समय ऐसा था जब दार्जिलिंग तक यहां का क्षेत्राधिकार फैला हुआ था। बंगाल के कई इलाके भी इसी अधिकार क्षेत्र में थे।’ लेकिन समय के साथ जिलों के पुनर्गठन, बांका के अलग होने, नवगछिया और कहलगांव में नई न्यायिक इकाइयों के गठन से न्यायिक गतिविधियां बिखरती गईं और भागलपुर की केंद्रीय भूमिका कम होती चली गई।

‘खंडपीठ बनी तो लाखों लोगों को मिलेगा राहत’

मार्च में शामिल वकीलों का कहना था कि भागलपुर की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या का दबाव, केसों की संख्या और इसका ऐतिहासिक महत्व सभी मिलकर इसे खंडपीठ के लिए योग्य बनाते हैं।
अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि पटना तक बार-बार जाना लोगों के लिए न सिर्फ महंगा है बल्कि समय साध्य भी, जिसका सीधा असर न्याय पाने की प्रक्रिया पर पड़ता है। उन्होंने चेतावनी भी दी –
‘यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।’ पूरे मार्च के दौरान शहर न्यायिक सुधार की मांग वाले नारों से गूंजता रहा और वकीलों ने साफ कहा कि यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।

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