गंगा की गोद में समाया लत्तीपुर-नरकटिया तटबंध
भागलपुर: ।गंगा फिर रुख बदल रही है, और इस बार उसकी लहरों ने बिहपुर प्रखंड के लत्तीपुर-नरकटिया जमींदारी तटबंध को निशाना बना लिया। मंगलवार की शाम जब गांव के लोग खेतों से लौट रहे थे, तभी एक जोरदार “धड़ाम” की आवाज़ ने सबको चौंका दिया। देखते ही देखते गौरीपुर एसडी कॉलेज के पीछे तटबंध का एक बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे गंगा में समा गया। करीब सौ मीटर लंबा इलाका धंसकर पानी में विलीन हो गया – जैसे धरती खुद थककर बैठ गई हो। तटीय इलाकों में गंगैया जब बढ़ते क्रम में होती है, तो वह चीखकर कोहराम मचाती है; और जब घटते क्रम में लौटती है, तो चुपके-चुपके तांडव रचती है।इस बार बाढ़ के समय नवगछिया के इलाके में बढ़ते क्रम की विभीषिका ने मानो लोगों की सांसें छीन लीं। गंगा की उफनती धार ने खेत-खलिहान, घर-द्वार, अनाज, बर्तन और पशुओं का चारा सब कुछ अपने साथ बहा ले गई। पीछे रह गए सिर्फ कीचड़, टूटे सपने और खामोश आंखों से बहते खून के आंसू।यह वही तटबंध है जो वर्षों से दर्जनों गांवों की सुरक्षा ढाल बना हुआ था। हर बरसात में जब गंगा उफान पर आती है, तो यही मिट्टी की दीवार लोगों के घर, खलिहान और उम्मीदों को डूबने से बचाती रही है। मगर अब वह खुद टूट गई है।सूचना मिलते ही नवगछिया फ्लड कंट्रोल के एसडीओ राजेश कुमार और जेई मंतोष कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने हालात का जायजा लिया और कहा कि फिलहाल गंगा का जलस्तर गिरावट पर है, इसलिए तत्काल किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन सतर्कता ज़रूरी है। अधिकारियों की निगरानी में क्षेत्र का निरीक्षण जारी है।गांववालों के चेहरों पर चिंता साफ झलक रही है। स्थानीय किसान रमेश मंडल बताते हैं “गंगा धीरे-धीरे नीचे से काट रही थी। गंगा बढ़ते और घटते दोनों क्रमों में तांडव करती है। हमलोगों ने कई बार विभाग को बताया भी, लेकिन अब जाकर पूरा तटबंध ही चला गया। अगर अगली बाढ़ से पहले मरम्मत नहीं हुई तो आधा गांव बह जाएगा।तटबंध के साथ बनी सड़क टूट जाने से अब आवागमन ठप हो गया है। पशुपालकों और किसानों को खेत तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे और बाजार की राहें लंबी हो गई हैं। गंगा की धार आज भले शांत हो, लेकिन नीचे से उसकी कटाव की चाल अब भी जारी है। मिट्टी लगातार सरक रही है और इसके साथ ही लोगों की नींद भी। ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि तुरंत स्थायी मरम्मत और पक्का बांध निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि आने वाली बाढ़ उनके गांवों को न लील जाए। फिलहाल, इस चुनावी मौसम में बिहपुर की धरती पर एक ही सवाल गूंज रहा है – क्या अगली बाढ़ से पहले ये दीवार फिर खड़ी हो पाएगी।



